रानीबाग पुल के पास भारी भूस्खलन से भीमताल मार्ग बंद, आवाजाही बाधित – पर्यटकों और स्थानीयों को लंबा रूट अपनाना पड़ा
नैनीताल/हल्द्वानी, 29 अगस्त 2025 |
नैनीताल जिले में काठगोदाम – रानीबाग – भीमताल मोटर मार्ग पर भारी बारिश के चलते एक बार फिर भूस्खलन का खतरा हकीकत बन गया। शुक्रवार सुबह रानीबाग पुल के समीप पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा गिर गया, जिससे मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। इससे हल्द्वानी से भीमताल और उससे आगे अल्मोड़ा की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।
कैमरे में कैद हुआ भूस्खलन, कई किलोमीटर लंबा जाम
सुबह होते ही जैसे ही मार्ग पर वाहन बढ़े, तभी अचानक पहाड़ी से भरभराकर मलबा गिरने लगा। घटनाक्रम वहां मौजूद लोगों के कैमरों में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। मलबा गिरने के तुरंत बाद कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। दोनों ओर से वाहनों की कतारें लग गईं, जिनमें स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राएं, सरकारी और निजी कर्मचारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी फंसे रहे।
प्रशासन सतर्क, यातायात को वैकल्पिक मार्ग पर मोड़ा गया
भूस्खलन की सूचना मिलते ही काठगोदाम पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। लोक निर्माण विभाग (PWD) को भी तत्काल सूचित किया गया। लेकिन भारी मलबे और लगातार हो रही बारिश के कारण मलबा हटाने में देरी हो रही है। फिलहाल प्रशासन ने ज्यूलिकोट, गेठिया और भूमियाधार होते हुए वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजने की व्यवस्था की है।
स्थानीय लोगों और यात्रियों को भारी असुविधा
यह मार्ग नैनीताल और अल्मोड़ा की ओर जाने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिसे शॉर्टकट रूट के तौर पर जाना जाता है। इसी मार्ग से रोजाना हजारों की संख्या में
-
स्कूल-कॉलेज के छात्र,
-
सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी,
-
स्थानीय नागरिक,
-
और पर्यटक आवाजाही करते हैं।
मार्ग के बंद हो जाने से लोगों को अब लगभग 10-15 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे न केवल यात्रा में देरी हो रही है बल्कि अतिरिक्त ईंधन खर्च और परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
स्थायी समाधान की मांग
इस मार्ग पर बारिश के दौरान लगातार भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि रानीबाग पुल के समीप यह संवेदनशील जोन वर्षों से खतरे की जद में है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। लोगों ने मांग की है कि
-
क्षेत्र में सुरक्षा दीवारें,
-
रिटेनिंग वॉल,
-
और भूस्खलन रोकने वाले उपाय शीघ्र किए जाएं ताकि हर वर्ष मानसून में बार-बार ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।