महिला आजीविका योजना में गड़बड़ी का आरोप, कांग्रेस बोली – तीन साल बाद भी महिलाएं खाली हाथ

महिला आजीविका योजना में गड़बड़ी, तीन साल बाद भी महिलाएं खाली हाथ कांग्रेस ने उठाए सवाल – 1.26 करोड़ अनुदान कहां गया? एनजीओ पर योजना में धांधली का आरोप, महिलाओं का भविष्य अधर में

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने मुख्यमंत्री महिला सतत् आजीविका योजना में बड़े घोटाले का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रायपुर और मालदेवता क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं को प्रशिक्षण मिलने के बावजूद आज तक अनुदान या परिसंपत्तियां नहीं मिलीं। जबकि, विभाग का दावा है कि पूरा पैसा संबंधित एनजीओ को दिया जा चुका है।

एनजीओ पर गड़बड़ी का आरोप

दसौनी ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर कहा कि योजना के लिए 2022 में चयनित 300 महिलाओं को डेयरी और मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रत्येक महिला को 50 हजार रुपये तक का अनुदान मिलना था। इसके लिए विभाग ने संस्था को 1.26 करोड़ रुपये जारी किए। इसके अलावा ट्रेनिंग कराने के लिए भी करीब 3.84 लाख रुपये संस्था को मिले। लेकिन, आज तक न तो गाय खरीदी गई और न ही बी-कीपिंग के उपकरण बांटे गए।

उन्होंने बताया कि विभाग ने जून 2025 में एनजीओ को नोटिस भी दिया था, लेकिन संस्था के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया। यहां तक कि अनुबंध में भी गड़बड़ी पाई गई है—जहां संस्था के अध्यक्ष/सचिव के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, वहां प्रोजेक्ट मैनेजर के हस्ताक्षर किए गए।

महिलाओं की तीन साल से ठगी

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि योजना के तहत 25-25 महिलाओं के समूह बनाए गए थे। उन्हें एक सप्ताह से लेकर एक महीने तक प्रशिक्षण दिया गया। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी लाभार्थियों को कोई सुविधा नहीं मिली। जिन महिलाओं ने गाय खरीदने के लिए अनुदान का इंतजार किया, उनका काफी नुकसान हो गया। कई गांवों—बजेत, सिरकी, रामनगर डांडा, मीडावाला और दुधियावाला—की महिलाएं लगातार विभाग और संस्था के चक्कर काट रही हैं।

योजना की शर्तें और वादा अधूरा

इस योजना के तहत निराश्रित, विधवा और कमजोर वर्ग की 18 से 50 वर्ष तक की महिलाओं को प्रशिक्षण और 50 हजार रुपये तक का अनुदान देने का वादा किया गया था। प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक महिला को 1000 रुपये छात्रवृत्ति भी दी जानी थी। लेकिन, वास्तविकता यह है कि महिलाओं को प्रशिक्षण तो दिया गया, मगर अनुदान और परिसंपत्तियां नहीं मिलीं।

योजना के तहत:

  • डेयरी प्रबंधन: क्रॉस ब्रीड गाय, पशुचारा, उपकरण आदि।

  • बी-कीपिंग: बी बॉक्स, हनी हार्वेस्टिंग किट, वैक्स शीट आदि।
    इन परिसंपत्तियों का वितरण अब तक अधर में है।

सरकार पर गंभीर सवाल

दसौनी ने आरोप लगाया कि संस्था का एक प्रभावशाली अधिकारी संरक्षण कर रहा है, इसलिए कार्रवाई नहीं हो पा रही। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि यदि पैसा वर्षों तक संस्था के बैंक खाते में पड़ा है, तो ब्याज सहित वह धनराशि सरकार को वापस क्यों नहीं दिलाई गई?

उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि महिला सशक्तिकरण पर केवल भाषण देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर योजनाओं की सच्चाई जानकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

https://www.breaknwaves.com/jet_skis_boat_rentals.html