सीएम कार्यालय में नौकरी का झांसा देकर 1.10 लाख की ठगी, देहरादून में चमोली निवासी व्यक्ति बना शिकार

देहरादून में नौकरी दिलाने के नाम पर एक बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। चमोली जिले के नंदप्रयाग निवासी बच्चीराम गौड़ से एक व्यक्ति ने खुद को मुख्यमंत्री कार्यालय का कर्मचारी बताकर उसके बेटे की उपनल के माध्यम से नौकरी लगवाने का दावा किया और इसी बहाने 1.10 लाख रुपये की ठगी कर ली। मामला सामने आने के बाद डालनवाला कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।

घटना 12 नवंबर 2024 की बताई जा रही है, जब बच्चीराम निजी कार्य से देहरादून आए थे। शाम करीब चार बजे वह परेड ग्राउंड स्थित एक दुकान में बैठे थे, तभी उनकी मुलाकात वीरेंद्र सिंह पिमोली से हुई। पीड़ित के अनुसार, वह आरोपित को पहले से जानते थे। बातचीत के दौरान वीरेंद्र ने दावा किया कि वह मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत है और उसके बड़े अधिकारियों से गहरे संबंध हैं। इसी दौरान उसने यह भी कहा कि यदि कोई सरकारी काम या नौकरी से संबंधित मदद चाहिए हो, तो वह करवा सकता है।

इस पर बच्चीराम ने बेटे की उपनल के तहत नौकरी की बात रखी। आरोपित ने आश्वासन देते हुए कहा कि वह यह काम आसानी से करवा देगा, लेकिन इसके बदले 1.50 लाख रुपये लेने की मांग की। इस झांसे में आकर बच्चीराम ने उसे तुरंत 15 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद कुछ समय में उन्होंने अलग-अलग तिथियों में 95 हजार रुपये और दे दिए। इस तरह कुल 1.10 लाख रुपये आरोपित को सौंप दिए गए।

समय बीतने के बावजूद नौकरी की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। जब बच्चीराम ने आरोपित से संपर्क करना चाहा तो उसने फोन उठाना बंद कर दिया। कई दिनों तक फोन नहीं उठाने के बाद बच्चीराम ने किसी अन्य नंबर से कॉल किया, जिस पर वीरेंद्र ने रूखा व्यवहार करते हुए कहा कि जो करना है कर लो। यह बात सुनकर बच्चीराम समझ गए कि उनके साथ ठगी हो चुकी है।

घटना की सूचना डालनवाला कोतवाली पुलिस को दी गई। प्रभारी निरीक्षक मनोज मैनवाल ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर आरोपी वीरेंद्र सिंह पिमोली निवासी ग्राम वाण, थराली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब वित्तीय लेनदेन, मोबाइल कॉल डिटेल और पीड़ित-आरोपी के बीच हुई मुलाकातों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।

पीड़ित बच्चीराम गौड़ ने कहा कि वह अपने बेटे के भविष्य के लिए मदद चाहता था, लेकिन विश्वास का गलत फायदा उठाकर उनसे हजारों रुपये हड़प लिए गए। पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में लोग अक्सर सरकारी पद या बड़े अधिकारियों से संबंध बताकर भोले-भाले नागरिकों को धोखा देते हैं। इसलिए किसी भी तरह की नियुक्ति, स्थानांतरण या अन्य कार्यों के लिए अनजान व्यक्तियों पर भरोसा न करने की अपील की गई है।

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