उत्तराखंड में बिजली दरों पर बड़ा फैसला जल्द, ऊर्जा निगमों के टैरिफ प्रस्तावों पर आयोग ने उठाए सवाल
18.50% तक बढ़ोतरी के प्रस्ताव में खामियां, 17 दिसंबर तक मांगा बिंदुवार जवाब
देहरादून। उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को नए साल से पहले राहत मिलेगी या झटका, इसका फैसला अब उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) के हाथ में है। प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों—यूपीसीएल (UPCL), यूजेवीएनएल (UJVNL) और पिटकुल (PITCUL)—की ओर से भेजे गए टैरिफ प्रस्तावों में कुछ गंभीर कमियां पाए जाने के बाद आयोग ने इन पर स्पष्टीकरण मांगा है।
आयोग ने तीनों निगमों को पत्र जारी कर 17 दिसंबर तक बिंदुवार जवाब देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद ही टैरिफ याचिकाएं औपचारिक रूप से स्वीकार की जाएंगी। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।
18.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव
इस बार ऊर्जा निगमों ने बिजली दरों में कुल मिलाकर करीब 18.50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है।
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यूपीसीएल ने बिजली वितरण दरों में 16.23 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है
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पिटकुल ने ट्रांसमिशन चार्ज में करीब 3 प्रतिशत बढ़ोतरी मांगी है
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यूजेवीएनएल ने पहली बार माइनस 1.2 प्रतिशत (ऋणात्मक) टैरिफ प्रस्ताव दिया है
यानी यदि यूजेवीएनएल का प्रस्ताव स्वीकार होता है तो उसे इस वर्ष किसी भी तरह की दर वृद्धि नहीं मिलेगी।
देरी से आया यूपीसीएल का प्रस्ताव
नियामक आयोग के समक्ष यूजेवीएनएल और पिटकुल ने अपने टैरिफ प्रस्ताव 30 नवंबर से पहले ही दाखिल कर दिए थे, जबकि यूपीसीएल ने करीब 9 दिसंबर को अपना प्रस्ताव सौंपा।
प्रस्तावों का प्रारंभिक अध्ययन करने के बाद आयोग के अधिकारियों ने कुछ वित्तीय और तकनीकी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इन कमियों के जवाब मिलने के बाद ही याचिकाओं को सार्वजनिक किया जाएगा।
फरवरी में होगी जनसुनवाई
नियामक आयोग के अनुसार, सभी जवाब मिलने के बाद—
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टैरिफ याचिकाएं दायर की जाएंगी
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फरवरी 2026 में प्रदेशभर में जनसुनवाई आयोजित होगी
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उपभोक्ताओं, उद्योगों और अन्य हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव लिए जाएंगे
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विस्तृत विश्लेषण के बाद अंतिम टैरिफ आदेश जारी किया जाएगा
इसके बाद नई बिजली दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी।
यूजेवीएनएल के ऋणात्मक टैरिफ प्रस्ताव पर मंथन
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) द्वारा प्रस्तुत ऋणात्मक टैरिफ प्रस्ताव ने आयोग के अधिकारियों को भी चौंका दिया है। ऋणात्मक टैरिफ का अर्थ है कि निगम ने इस वर्ष किसी भी प्रकार की दर वृद्धि की मांग नहीं की है।
अब आयोग यह जांच करेगा कि—
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यह प्रस्ताव वित्तीय रूप से कितना व्यावहारिक है
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क्या इससे भविष्य में उत्पादन और रखरखाव पर असर पड़ेगा
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या फिर यह उपभोक्ताओं को राहत देने का रणनीतिक कदम है