“नाम बदलने का साहस: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में इतिहास रच दिया”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लोकप्रियता का ग्राफ जिस तेजी से छलागें भर रहा है वह बेवजह नहीं है। उनके द्वारा एक के बाद एक फैसले जिस तेज गति से लिए जा रहे हैं तथा बड़े से बड़े फैसले लेने में भी किसी तरह की हिचक नहीं की जा रही है उनके समर्थकों की नजर में यही उनकी कामयाबी की असल वजह बताई जा रही है तथा वह उनके फैसलों पर खूब जश्न मनाते भी दिख रहे हैं। भले ही हम और आप यह सुनते आए हो कि नाम में क्या रखा है? लेकिन आज के दौर में इसका मतलब और मायने पूरी तरह से बदल चुके हैं। सच यही है कि नाम में ही सब कुछ रखा है। नाम बड़ा हो तो फिर काम के कोई मायने नहीं रहते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें वह देश के प्रभावशाली नेताओं की सूची में 65वें से सीधे 31वें स्थान पर पहुंच गए हैं। इस उपलब्धि में उनके द्वारा लिए गए बड़े फैसलों का अहम योगदान रहा है। इनमें सबसे प्रमुख फैसला उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करना है, इसके अलावा उन्होंने नकल विरोधी कानून, भू कानून, दंगाइयों से संपत्ति वसूलने जैसे कई कदम उठाए हैं, जिससे उनकी छवि एक सशक्त और तेज-तर्रार नेता के रूप में उभरी है।

लेकिन हाल ही में उनका एक और विवादास्पद और चर्चित फैसला सामने आया, जिसमें उन्होंने राज्य की राजधानी देहरादून सहित चार जिलों के 15 स्थानों और दो मार्गों के नाम बदलने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि यह फैसला उत्तराखंड की देव संस्कृति और जन भावनाओं के आधार पर लिया गया है। उनका मानना है कि राज्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रतीकों को सम्मानित किया जाना चाहिए।

अब तक का सबसे अहम पहलू यह है कि जिन स्थानों के नाम बदले गए हैं, वे सभी मुग़लकालीन नाम थे, जिन्हें अब सनातनी और संघ के दृष्टिकोण से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित और सम्मानित करना बताया जा रहा है। इस फैसले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कई कदमों की झलक देखने को मिल रही है, लेकिन इस तरह का कदम यूपी में भी नहीं उठाया गया।

हालांकि, इस फैसले को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने विरोध जताया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने बिना स्थानीय लोगों की राय लिए इस फैसले को लागू किया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति है और भाजपा के पास जनता के लिए कोई ठोस काम नहीं बचा है, इसलिए वह नाम बदलने की राजनीति कर रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि इस फैसले को जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है और इसे जनभावनाओं के अनुसार लिया गया है।

इस फैसले ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस फैसले में कोई गलत नहीं दिख रहा, और इसे उनके नेतृत्व के तहत एक महत्वपूर्ण और साहसिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह साबित कर दिया है कि नाम बदलने का साहस सिर्फ सत्ता में बैठे नेताओं का नहीं होता, बल्कि यह जनता की भावनाओं को समझकर लिए गए बड़े फैसले का परिणाम है।

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