चमोली हिमस्खलन: 50 मजदूरों को बचाया गया, 4 की मौत; रेस्क्यू के लिए Mi-17 और चीता हेलीकॉप्टर तैनात

चमोली, 2 मार्च 2025: उत्तराखंड के चमोली जिले में 28 फरवरी को हुए हिमस्खलन के बाद बचाव कार्यों में तेजी लाई गई है। रविवार को रेस्क्यू अभियान के दूसरे दिन तक, सेना और वायुसेना की मदद से 50 मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि चार लोगों की मौत हो गई है। चार अन्य मजदूर अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश में बचाव दल जुटा हुआ है।

हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र में जारी बचाव अभियान

चमोली के माणा गांव के पास सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कैंप में हुए हिमस्खलन में कुल 54 मजदूरों के लापता होने की खबर थी। इनमें से 50 मजदूरों को अब तक बचा लिया गया है और उनके उपचार के लिए जोशीमठ के आर्मी अस्पताल भेजा जा रहा है। वहीं, चार की मौत हो चुकी है। यह घटना बीआरओ के कैंप के पास शनिवार को घटी थी, और तभी से वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए बचाव कार्य जारी है।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन सचिव, विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि मौसम की स्थिति अब थोड़ी सुधरने के बाद रेस्क्यू में मदद मिल रही है। वायुसेना के Mi-17 हेलीकॉप्टर और चीता हेलीकॉप्टर रेस्क्यू में लगे हुए हैं। साथ ही, एसडीआरएफ की टीम भी थर्मल इमेजिंग कैमरा और लोकेटिंग कैमरा के साथ लापता व्यक्तियों की तलाश में जुटी हुई है।

रविवार को हुए रेस्क्यू ऑपरेशन के प्रमुख बिंदु

रविवार को सेना और एक निजी कंपनी का हेलीकॉप्टर रेस्क्यू में जुटा था। हेलीकॉप्टरों के द्वारा घायलों को जोशीमठ आर्मी अस्पताल भेजा गया और बर्फ के नीचे दबे अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। रविवार को कुल 10 घायलों को जोशीमठ लाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित आपदा नियंत्रण कक्ष में बैठकर इस रेस्क्यू अभियान की समीक्षा की और अधिकारियों को हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।

रेस्क्यू अभियान में आ रही चुनौतियां

हिमस्खलन के कारण बद्रीनाथ-माणा क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई है, और सड़कें भी बर्फ से जाम हो गई हैं। बद्रीनाथ के पास 6-7 फीट बर्फ जमा हो चुकी है, जिससे राहत कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके बावजूद, राहत और बचाव टीमों के लगभग 200 सदस्य, जिसमें सेना, आईटीबीपी, बीआरओ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन सेवाएं शामिल हैं, इस कठिन इलाके में काम कर रहे हैं।

वहीं, सेना ने अपने हेलीपैड को आपातकालीन कार्यों के लिए तैयार किया है। इसके अलावा, बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें से 5-6 किलोमीटर के हिस्से को साफ करने के प्रयास जारी हैं।

मुख्यमंत्री का दौरा और हवाई सर्वेक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया था। उन्होंने अस्पताल में भर्ती बीआरओ कर्मियों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि राहत कार्यों में कोई कमी न हो और केंद्र सरकार की ओर से सभी आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाए।

रेस्क्यू में उपयोग किए गए अत्याधुनिक उपकरण

रेस्क्यू ऑपरेशन में तकनीकी मदद के लिए एसडीआरएफ द्वारा पीड़ित लोकेटिंग कैमरा (VLC) और थर्मल इमेज कैमरा का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये उपकरण बर्फ के नीचे दबे मजदूरों का पता लगाने में मदद कर रहे हैं।

आगे की योजना और उम्मीदें

रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है और चार लापता मजदूरों की तलाश की जा रही है। राज्य सरकार और वायुसेना के अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही बर्फ में दबे बाकी मजदूरों को भी सुरक्षित निकाला जा सकेगा।

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