चमोली के हरमल गांव के रहने वाले थे विश्वनाथ प्रताप सिंह, उरी सेक्टर में तैनाती के दौरान हार्ट अटैक से हुई मौत; 7 साल की बेटी और 4 साल के बेटे के सिर से उठा पिता का साया
चमोली/देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। भारतीय सेना में तैनात नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया का जम्मू-कश्मीर में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके असामयिक निधन से पैतृक गांव हरमल सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। देश की रक्षा में करीब 24 साल तक सेवाएं देने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया शुक्रवार, 30 अक्टूबर को पंचतत्व में विलीन हो गए। हरिद्वार में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया भारतीय सेना की 11 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे। जानकारी के अनुसार, उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में थी। बीती 28 अक्टूबर को बारामूला क्षेत्र में उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया, जिसके कारण उनका निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। वहीं, चमोली जिले के हरमल गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
24 साल तक भारतीय सेना में दी सेवाएं
विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया ने अपने जीवन के करीब 24 साल देश की सेवा और सुरक्षा के लिए समर्पित किए। भारतीय सेना की 11 गढ़वाल राइफल्स में नायब सूबेदार के पद पर रहते हुए उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। देश की सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले इस जवान का अचानक दुनिया से चले जाना परिवार के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों के लिए भी गहरा सदमा है।
उनके निधन की खबर से गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
तीन पीढ़ियों से सेना में सेवा की परंपरा
नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके पिता देव सिंह गड़िया भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। वहीं, उनके दो बड़े भाई नरेंद्र सिंह और प्रवीण सिंह भी सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
इस तरह परिवार की तीन पीढ़ियों से जुड़ी देशसेवा की परंपरा में विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपने जीवन के 24 साल भारतीय सेना को समर्पित किए। उनके असामयिक निधन से परिवार की यह गौरवशाली सैन्य परंपरा एक गहरे दुख से गुजर रही है।
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में पिता देव सिंह गड़िया, माता नारायणी देवी, पत्नी जानकी देवी, सात वर्षीय बेटी शानवी और चार वर्षीय बेटा श्रेयांश हैं।
पिता के अचानक चले जाने से दोनों मासूम बच्चों के सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है। पति को खोने के गम में पत्नी जानकी देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, बुजुर्ग माता-पिता ने अपने बेटे को खो दिया है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
चमोली पुलिस ने दी श्रद्धांजलि
नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया के निधन पर चमोली पुलिस ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है। पुलिस की ओर से दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। साथ ही ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की गई।
शुक्रवार को हरिद्वार में अंतिम संस्कार के साथ ही देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले इस वीर सैनिक को अंतिम विदाई दी गई। 24 वर्षों तक देश की रक्षा में योगदान देने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह गड़िया की स्मृतियां उनके परिवार, गांव और क्षेत्रवासियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।