उत्तराखंड बेरोजगार संघ के नेतृत्व में परेड ग्राउंड में जुटे प्रदेशभर के युवा, खाली पदों पर नियमित भर्ती और लंबित चयन प्रक्रियाएं पूरी करने की उठाई मांग
देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे बेरोजगार युवाओं का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नई भर्ती शुरू करने और वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने की मांग को लेकर शुक्रवार को राजधानी देहरादून में युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे युवाओं ने परेड ग्राउंड में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद युवाओं ने सचिवालय कूच करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिससे पुलिस और युवाओं के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई।
29 अक्टूबर से शुरू हुआ आंदोलन, 30 अक्टूबर को तेज हुआ प्रदर्शन
उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में यह आंदोलन 29 अक्टूबर से शुरू हुआ था। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को प्रदर्शन में युवाओं की भागीदारी बढ़ गई। सुबह से ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से बेरोजगार युवा परेड ग्राउंड पहुंचने लगे थे। हाथों में मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर पहुंचे युवाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में हजारों पद लंबे समय से रिक्त हैं, लेकिन इन पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है। वहीं, जिन पदों के लिए पहले से भर्ती प्रक्रिया चल रही है, उनमें भी अनावश्यक देरी हो रही है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
बैरिकेडिंग तोड़कर सचिवालय पहुंचने की कोशिश
परेड ग्राउंड में प्रदर्शन के बाद बेरोजगार युवाओं ने सचिवालय की ओर कूच करने का प्रयास किया। युवाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग की थी। हालांकि, प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। इस दौरान पुलिस और युवाओं के बीच नोकझोंक की स्थिति भी बनी।
युवाओं ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। इसी कारण उन्हें सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
17 सूत्रीय मांग पत्र में खाली पदों पर भर्ती की मांग
प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार युवाओं ने सरकार के सामने 17 सूत्रीय मांग पत्र रखा है। इसमें विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर जल्द भर्ती विज्ञप्ति जारी करने और लंबित चयन प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग प्रमुखता से शामिल है।
संघ की प्रमुख मांगों में सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, शहरी विकास विभाग और उच्च शिक्षा विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती शुरू करना शामिल है। इसके अलावा प्रदेश के आईटीआई और पॉलीटेक्निक संस्थानों में अनुदेशकों के रिक्त पदों को भी शीघ्र भरने की मांग उठाई गई।
युवाओं का कहना है कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद नियमित भर्ती नहीं होने से रोजगार के अवसर लगातार प्रभावित हो रहे हैं। सरकार को इन रिक्त पदों का आकलन कर जल्द भर्ती कैलेंडर जारी करना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को स्पष्ट जानकारी मिल सके कि किस विभाग में कब भर्ती होगी।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर नियमित भर्ती की मांग
उत्तराखंड बेरोजगार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि सरकार आउटसोर्सिंग के नाम पर युवाओं का शोषण कर रही है और नियमित नियुक्तियों की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने मांग की कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त कर सरकारी विभागों के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएं।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और परीक्षाओं का आयोजन निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और जांच कराई जाए तथा जिन परीक्षाओं के परिणाम घोषित होने बाकी हैं, उन्हें भी जल्द जारी किया जाए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शनकारी युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी 17 सूत्रीय मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशभर में और व्यापक किया जाएगा। युवाओं का कहना है कि रोजगार केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए धरातल पर नियमित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।
फिलहाल बेरोजगार युवाओं के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर उत्तराखंड में सरकारी भर्तियों, खाली पदों और लंबित चयन प्रक्रियाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। अब देखना होगा कि सरकार बेरोजगार संघ की 17 सूत्रीय मांगों पर क्या कदम उठाती है।