15 छात्राओं के हस्ताक्षर वाली शिकायत का दावा, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने की काउंसलिंग; आरोपी शिक्षक ने भी रखा अपना पक्ष
देहरादून। राजधानी देहरादून के एक प्रतिष्ठित स्कूल में छात्रा के साथ कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। छात्रा की शिकायत, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की काउंसलिंग और पुलिस में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले को लेकर एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
यह मामला अब केवल छात्रा की शिकायत और आरोपी शिक्षक के पक्ष तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्कूल में विद्यार्थियों की सुरक्षा, शिकायतों के निस्तारण और प्रबंधन की जवाबदेही का मुद्दा भी बन गया है।
23 अक्टूबर को मां के साथ स्कूल पहुंची छात्रा
पीड़ित परिवार के अनुसार, 23 अक्टूबर को छात्रा अपनी मां के साथ स्कूल पहुंची और संबंधित शिक्षक के खिलाफ प्रबंधन को लिखित शिकायत दी। परिवार का दावा है कि शिकायत पर 15 छात्राओं के हस्ताक्षर हैं। परिजनों के मुताबिक, इससे पहले 15 अक्टूबर को भी शिक्षक के खिलाफ शिकायत की गई थी।
परिवार का आरोप है कि उस समय स्कूल प्रबंधन ने शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कार्रवाई करने के बजाय छात्रा पर ही दबाव बनाया जाने लगा। परिजनों ने स्कूल के निदेशक पर भी शिक्षक का पक्ष लेने का आरोप लगाया है।
इन आरोपों से नाराज परिवार ने संबंधित शिक्षक को बर्खास्त करने और स्कूल के निदेशक से प्रार्थना सभा में सभी विद्यार्थियों के सामने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और स्कूल प्रबंधन की भूमिका से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने की काउंसलिंग, पुलिस ने दर्ज की FIR
मामले की जानकारी सामने आने के बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने छात्रा की काउंसलिंग की। इसके बाद छात्रा ने पुलिस को तहरीर दी, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
अब पुलिस के सामने शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करने की जिम्मेदारी है। छात्रा के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित पक्षों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
प्राथमिकी दर्ज होना जांच की शुरुआत है। आरोपों की पुष्टि और किसी की जिम्मेदारी तय करने का निर्णय जांच में सामने आने वाले तथ्यों तथा कानून के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
आरोपी शिक्षक ने भी रखा अपना पक्ष
आरोपी शिक्षक का कहना है कि उनके खिलाफ पहले कभी इस तरह की शिकायत सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके व्यवहार से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह माफी मांगते हैं।
शिक्षक के इस पक्ष के बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में छात्रा की बात को संवेदनशीलता से सुना जाना चाहिए और किसी भी पक्ष के साथ पूर्वाग्रह के बिना तथ्यों की पड़ताल होनी चाहिए।
स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल
इस प्रकरण में स्कूल प्रबंधन की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। यदि किसी छात्र या छात्रा की ओर से शिक्षक के व्यवहार को लेकर शिकायत की जाती है, तो प्रबंधन को उसे गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
इस मामले में प्रमुख सवाल यह हैं कि 15 अक्टूबर को कथित रूप से की गई शिकायत पर क्या कदम उठाए गए, 23 अक्टूबर को दी गई लिखित शिकायत के बाद प्रबंधन ने क्या कार्रवाई की और छात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन से उपाय किए गए।
इन सवालों पर स्कूल प्रबंधन का स्पष्ट पक्ष सामने आना भी जरूरी है। किसी संस्थान की प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनका भरोसा है।
NSUI ने स्कूल के बाहर किया प्रदर्शन
मामले ने अब विरोध का रूप भी ले लिया है। एनएसयूआई से जुड़े छात्रों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने छात्रा को न्याय दिलाने और मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के बाद स्कूल प्रबंधन पर मामले को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखने का दबाव बढ़ा है। हालांकि, पूरे प्रकरण में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों पर कार्रवाई सबसे अहम
देहरादून के प्रतिष्ठित स्कूल से जुड़ा यह मामला शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था पर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। स्कूलों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां विद्यार्थी बिना डर अपनी शिकायत रख सकें और उनकी बात को गंभीरता से सुना जाए।