देहरादून। पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा पेश किए गए इस वर्ष के बजट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। गैरसैंण में शुरू हुए उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन मुख्यमंत्री ने 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया और इसे राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बजट बताया।
हालांकि विपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा कराए बिना बजट पेश करना संसदीय परंपराओं के विपरीत है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी विधायकों ने विधानसभा परिसर में सीढ़ियों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन भी किया।
बजट का आकार बढ़ना कितना ऐतिहासिक?
सरकार का कहना है कि यह राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आमतौर पर हर वर्ष बजट का आकार बढ़ता ही है। इसलिए केवल बजट का आकार बढ़ना अपने आप में ऐतिहासिक नहीं माना जा सकता।
उत्तराखंड के गठन के बाद वर्ष 2002 में पहली निर्वाचित सरकार ने करीब 4 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इसके बाद हर वर्ष बजट का आकार बढ़ता गया। बीते वर्ष मुख्यमंत्री धामी ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जो इस बार बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
सत्र की अवधि पर भी उठते रहे सवाल
राज्य गठन के बाद से अब तक लगभग 24 वर्षों में विधानसभा सत्रों के कुल कार्य दिवसों की संख्या करीब 358 ही रही है। यानी औसतन हर वर्ष विधानसभा के दोनों सत्र मिलाकर 11 से 12 दिन ही चल पाए हैं। कई बार सत्र सात या नौ दिन में ही समाप्त हो गए।
विपक्ष लगातार सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग करता रहा है। बीते कई वर्षों से विपक्षी विधायक इस मुद्दे पर धरना और प्रदर्शन भी करते रहे हैं।
प्रश्नकाल से बचने के आरोप
विपक्ष का आरोप है कि इस बार भी सरकार ने ऐसी कार्ययोजना बनाई जिससे मुख्यमंत्री को सीधे तौर पर विपक्ष के सवालों का सामना न करना पड़े। आमतौर पर सोमवार को होने वाले प्रश्नकाल में मुख्यमंत्री से जुड़े विभागों के सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन इस बार कार्यवाही की व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।
स्वास्थ्य योजनाओं के लिए प्रावधान
सरकार ने बजट में गोल्डन कार्ड और आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों के कैशलेस इलाज के लिए करीब 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि अस्पतालों का बकाया इससे कहीं अधिक है और यदि भुगतान समय पर नहीं हुआ तो भविष्य में मरीजों को इलाज में दिक्कतें आ सकती हैं।
कुल मिलाकर सरकार इसे विकास और जनकल्याण पर आधारित बजट बता रही है, जबकि विपक्ष इसे केवल आंकड़ों का खेल बताते हुए कई सवाल खड़े कर रहा है।