उत्तराखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज: 48 घंटे बाद ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार, पांच जिलों के लिए अलर्ट

उत्तराखंड में फिलहाल मौसम शांत बना हुआ है, लेकिन अगले 48 घंटों में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हलचल देखने को मिल सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार 16 फरवरी को पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और कहीं भी बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं है। दिन में हल्की धूप खिलने से ठंड से कुछ राहत मिलेगी, हालांकि सुबह और शाम के समय ठिठुरन बरकरार रहेगी। न्यूनतम तापमान में भी किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।

 17–18 फरवरी को इन पांच जिलों में बदलेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार 17 और 18 फरवरी को राज्य के पर्वतीय जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की वर्षा और बर्फबारी की संभावना बन रही है।

संभावित प्रभावित जिले:

  • उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़

इन जिलों में लगभग 3300 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कहीं–कहीं हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। निचले इलाकों और मैदानी जिलों में मौसम शुष्क ही रहने का अनुमान है।

 दिनवार मौसम का हाल

17 फरवरी

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बारिश या बर्फबारी के आसार, शेष प्रदेश में मौसम साफ और शुष्क।

 18 फरवरी

पर्वतीय ऊंचाई वाले इलाकों में बहुत हल्की वर्षा या बर्फबारी की संभावना, अन्य क्षेत्रों में मौसम सामान्य।

 19 फरवरी

पूरे उत्तराखंड में फिर से शुष्क मौसम, कहीं भी वर्षा या बर्फबारी के संकेत नहीं।

 यानी दो दिन की हलचल के बाद मौसम फिर से साफ हो जाएगा।

तापमान और ठंड का असर

  • सुबह और शाम ठंड का असर बना रहेगा

  • ऊंचाई वाले इलाकों में तापमान में गिरावट संभव

  • बर्फबारी वाले क्षेत्रों में ठंडी हवाएं बढ़ सकती हैं

 यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए जरूरी सलाह

मौसम विभाग ने खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने वालों को सतर्क रहने की सलाह दी है—

  • यात्रा से पहले ताज़ा मौसम अपडेट जरूर लें

  • पर्याप्त गर्म कपड़ों की व्यवस्था करें

  • संवेदनशील और बर्फबारी वाले मार्गों पर सावधानी से वाहन चलाएं

  • ऊंचाई वाले इलाकों में फिसलन और तापमान गिरने को ध्यान में रखें

 पर्यटन और चारधाम मार्गों पर क्या असर?

हल्की बर्फबारी से ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ेगी, जिससे हिमालयी क्षेत्रों की चोटियां एक बार फिर बर्फ की सफेद चादर से ढक सकती हैं। हालांकि यह गतिविधि बहुत सीमित और हल्की रहने की संभावना है, इसलिए बड़े स्तर पर जनजीवन प्रभावित होने के संकेत नहीं हैं।

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