ज्योतिर्मठ में असुरक्षित भवनों पर अंतिम फैसला: भू-धंसाव से जर्जर 55 इमारतें होंगी ध्वस्त, प्रशासन जल्द शुरू करेगा कार्रवाई
चमोली/ज्योतिर्मठ: उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में वर्ष 2023 में हुए भयावह भू-धंसाव के प्रभाव अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। आपदा के दौरान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए 55 भवनों को प्रशासन ने पूरी तरह असुरक्षित घोषित करते हुए ध्वस्त करने की तैयारी तेज कर दी है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की तकनीकी टीम द्वारा विस्तृत सर्वे के बाद इन भवनों को निष्प्रयोज्य (रहने लायक नहीं) माना गया है।
टेक्निकल सर्वे के बाद लिया गया निर्णय
भू-धंसाव की घटना के बाद से ही प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा था। हाल ही में विशेषज्ञों की टीम ने चिन्हित भवनों का पुनः निरीक्षण किया। सर्वे में पाया गया कि इन इमारतों की दीवारों, नींव और ढांचे में गहरी दरारें हैं, जो समय के साथ और चौड़ी हो चुकी हैं। जमीन धंसने की वजह से संरचनात्मक संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है, जिससे इनका मरम्मत योग्य होना संभव नहीं माना गया।
पहले ही खाली हो चुके हैं भवन
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन 55 भवनों के स्वामी पहले ही अपने घर खाली कर चुके हैं। भू-धंसाव के समय बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित किया गया था। प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से मुआवजा भी दिया जा चुका है।
आपदा के शुरुआती चरण में भी कई जर्जर भवनों को गिराया गया था, लेकिन तकनीकी समीक्षा के बाद अब यह दूसरा बड़ा चरण होगा जिसमें शेष खतरनाक ढांचों को हटाया जाएगा।
क्यों जरूरी है ध्वस्तीकरण?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन इमारतों को खड़ा रहने देना आसपास के क्षेत्रों के लिए भी खतरा बन सकता है।
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कभी भी ढहने की आशंका
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आसपास के रास्तों और अन्य भवनों को नुकसान
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लोगों की आवाजाही पर जोखिम
इन्हीं कारणों से प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया है।
प्रशासन ने बढ़ाई सक्रियता
उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया:
“नगर में भू-धंसाव के दौरान जर्जर हुए जो भवन रहने लायक नहीं हैं, उनका जल्द ध्वस्तीकरण किया जाएगा। लगभग 55 भवन चिन्हित किए गए हैं। तकनीकी टीम निरीक्षण कर चुकी है और कार्रवाई शीघ्र शुरू होगी।”