मंत्रियों की सुविधाओं में इजाफा, जनता पर महंगाई की मार सरकार की प्राथमिकताओं पर उठे सवाल

देहरादून। उत्तराखंड में मंत्रियों के यात्रा भत्ते की सीमा बढ़ाए जाने के फैसले ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। जहां एक ओर प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझ रही है, वहीं सरकार द्वारा मंत्रियों के आवागमन पर खर्च की मासिक सीमा 60 हजार रुपये से बढ़ाकर 90 हजार रुपये किए जाने के निर्णय पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत साहू ने इस फैसले को “जनता के साथ अन्याय” और सरकारी धन की “खुली लूट” करार दिया है।

प्रेस को जारी बयान में हेमंत साहू ने कहा कि धामी सरकार लगातार जन मुद्दों से भटकती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश इस समय कर्ज के बोझ, बढ़ती महंगाई, युवाओं में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पहाड़ों से हो रहे पलायन जैसी गंभीर समस्याओं से घिरा हुआ है, लेकिन सरकार का ध्यान आम जनता की परेशानियों पर नहीं, बल्कि मंत्रियों की सुविधाएं बढ़ाने पर केंद्रित है।

साहू ने कहा कि जिस समय प्रदेश के हजारों परिवार सीमित आय में गुजारा करने को मजबूर हैं, उस समय मंत्रियों के यात्रा खर्च में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करना असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। उन्होंने इसे “जनभावनाओं का अपमान” बताते हुए कहा कि यह फैसला साफ दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकताएं आम नागरिक नहीं, बल्कि सत्ता से जुड़े लोग हैं।

उन्होंने विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा पेंशन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश की विधवा महिलाएं, तलाकशुदा महिलाएं, दिव्यांगजन और बुजुर्ग आज भी मात्र 1500 रुपये प्रतिमाह की पेंशन में जीवन यापन कर रहे हैं। महंगाई के इस दौर में यह राशि बेहद कम है, लेकिन सरकार इन वर्गों की पेंशन बढ़ाने की बजाय मंत्रियों पर खर्च बढ़ा रही है।

युवा कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि अगर सरकार के पास अतिरिक्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध हैं, तो उनका उपयोग जनकल्याणकारी योजनाओं में क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने, स्वरोजगार योजनाओं को मजबूत करने, स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने और पलायन रोकने जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

साहू ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो युवा कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने मांग की कि मंत्रियों के यात्रा भत्ते में की गई बढ़ोतरी को तत्काल वापस लिया जाए और कमजोर वर्गों की पेंशन व सामाजिक योजनाओं में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए।

प्रदेश में पहले से ही बढ़ती महंगाई और रोजगार के सीमित अवसरों को लेकर जनता में असंतोष देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार के इस निर्णय ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी गलियारों से निकलकर सड़कों तक पहुंच सकता है।

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