सूखी ठंड ने बढ़ाया संकट: पहाड़ों में बारिश–बर्फबारी न होने से पर्यावरण और सेहत दोनों पर मार

नैनीताल में 4 माह से सूखा, झील का जलस्तर घटा, बीमारियां और वनाग्नि की घटनाएं बढ़ीं

नैनीताल।उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इस वर्ष बारिश और बर्फबारी न होने से सूखी ठंड (ड्राई कोल्ड) ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। इसके चलते जहां एक ओर पर्यावरण असंतुलन और जलस्रोतों पर असर साफ नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर आमजन की सेहत पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विशेषज्ञ और चिकित्सक दोनों ही मौजूदा मौसम रुख को लेकर चिंता जता रहे हैं।

चार महीने से बारिश-बर्फबारी नहीं, हर तरफ सूखा

सरोवर नगरी नैनीताल में बीते करीब चार महीनों से न तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी, जिससे पूरे क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। इसका सीधा असर नैनीताल झील सहित अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों पर दिखाई दे रहा है।

नैनीताल झील का जलस्तर घटा

  • 15 जनवरी 2025 तक झील का जलस्तर: 84 फीट 3 इंच

  • 15 जनवरी 2026 तक झील का जलस्तर: 83 फीट 7.5 इंच

यानी पिछले वर्ष की तुलना में झील का जलस्तर करीब 7.5 इंच कम दर्ज किया गया है, जो आने वाले समय के लिए चिंता का विषय है।

वार्षिक वर्षा के आंकड़े बढ़े, लेकिन सर्दियों में सूखा हावी

यदि पूरे वर्ष की वर्षा पर नजर डालें तो आंकड़े भ्रमित करने वाले नजर आते हैं—

  • 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक: 2133 मिमी वर्षा

  • 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक: 2344 मिमी वर्षा

यानी सालाना वर्षा पिछले वर्ष के मुकाबले 211 मिमी अधिक रही, लेकिन सर्दियों में बारिश और बर्फबारी का न होना ही मौजूदा संकट की सबसे बड़ी वजह बन गया है।

प्राकृतिक स्रोत सूखने लगे, वनाग्नि का खतरा बढ़ा

लगातार सूखे के कारण—

  • प्राकृतिक जलधाराएं और नौले प्रभावित हो रहे हैं

  • जंगलों में नमी की भारी कमी देखी जा रही है

  • वनाग्नि की घटनाएं बढ़ने लगी हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है

सूखी पत्तियों और घास के कारण जंगलों में आग तेजी से फैल रही है, जिससे जैव विविधता और वन्यजीव दोनों खतरे में हैं।

विशेषज्ञ की चेतावनी: जैव विविधता पर गहरा असर

डीएसबी कॉलेज, नैनीताल के वनस्पति विभाग के प्रोफेसर ललित तिवारी ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है।
उन्होंने कहा—

“बारिश, बर्फबारी और नमी की कमी से पर्यावरण पर सीधा असर पड़ रहा है। अब कोहरे का प्रकोप मैदानों के साथ-साथ पहाड़ों में भी बढ़ रहा है। सूखे के कारण जंगलों में आग आसानी से लग रही है, जिससे जैव विविधता और वन्यजीव गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।”

सूखी ठंड से बीमारियां बढ़ीं, बच्चे और अस्थमा मरीज ज्यादा प्रभावित

सूखी ठंड का असर आम लोगों की सेहत पर भी साफ नजर आ रहा है।
बीड़ी पांडे अस्पताल, नैनीताल के चिकित्सकों के अनुसार—

  • अस्थमा मरीजों की परेशानी बढ़ी

  • छोटे बच्चों में बुखार, खांसी और सर्दी के मामले ज्यादा

  • श्वसन संबंधी रोग तेजी से उभर रहे हैं

डॉक्टरों की सलाह: सावधानी ही बचाव

चिकित्सकों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है—

  • शरीर को गर्म रखें

  • बीमार व्यक्ति समय पर दवाइयां लें

  • अस्थमा मरीज नियमित रूप से इनहेलर/पंप का उपयोग करें

  • सुबह और शाम की ठंड से बचें

  • वॉक करने वाले लोग दिन के समय टहलें, ताकि ठंड के असर से बचा जा सके

कुल मिलाकर हालात चिंताजनक

उत्तराखंड के पहाड़ों में सूखी ठंड ने यह साफ कर दिया है कि मौसम का बदलता स्वरूप अब केवल प्राकृतिक समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। यदि आने वाले समय में बारिश और बर्फबारी नहीं हुई, तो जल संकट, बीमारियां और वनाग्नि की घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।

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