उत्तराखंड में इंदौर जैसा मामला: हल्द्वानी के गांधीनगर में नल से आ रहा गंदा पानी, 14 माह की बच्ची बीमार

हल्द्वानी। मध्यप्रदेश के इंदौर में सामने आए दूषित पेयजल मामले के बाद पूरे देश में पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। इसी बीच उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के प्रवेशद्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी से भी एक चिंताजनक मामला सामने आया है। शहर के मध्य स्थित गांधीनगर क्षेत्र में पिछले करीब दो माह से नलों से गंदा और दूषित पानी आ रहा है, जिससे कई बच्चे बीमार पड़ चुके हैं। इनमें 14 महीने की एक मासूम बच्ची भी शामिल है, जिसकी तबीयत बिगड़ने से इलाके में हड़कंप मच गया है।

सात हजार की आबादी, लेकिन साफ पानी नहीं

करीब 7 हजार की आबादी वाले गांधीनगर क्षेत्र में सुबह-शाम नियमित जलापूर्ति तो हो रही है, लेकिन लोगों का कहना है कि पानी पीने योग्य नहीं है। नल खोलते ही गंदा, बदबूदार और तलछटयुक्त पानी आ रहा है। मजबूरी में लोग या तो पानी उबालकर पी रहे हैं या बाजार से बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं।
हालांकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बोतलबंद पानी खरीदना संभव नहीं है, इसलिए वे पास के नलकूपों से पानी ढोकर ला रहे हैं।

दूषित पानी से बिगड़ी मासूम की तबीयत

स्थानीय निवासी विमला देवी ने बताया कि उनकी 14 महीने की बच्ची राधिका की तबीयत दूषित पानी पीने के कारण खराब हुई। डॉक्टरों ने साफ तौर पर उबला या बोतलबंद पानी देने की सलाह दी है।
इसी तरह भगवती देवी ने बताया कि उनके नाती की तबीयत भी लगातार खराब चल रही है। निर्मला नामक महिला ने बताया कि उनके परिवार को इंदिरानगर स्थित नलकूप से पानी लाकर काम चलाना पड़ रहा है।

 लोगों की पीड़ा, हर गली में एक ही शिकायत

गांधीनगर की गलियों में लोगों से बात करने पर लगभग हर व्यक्ति की जुबान पर एक ही शिकायत थी—

“पानी आ रहा है, लेकिन साफ नहीं।”

महिलाओं ने बताया कि फिटकरी या नमक डालकर पानी उबालने के बाद ही पीने लायक बनता है। लापरवाही बरतने पर बीमार पड़ने का डर बना हुआ है। बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्थिति और भी खतरनाक है।

 नाले के भीतर से गुजर रही पेयजल लाइन

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान एक और गंभीर बात सामने आई। गांधीनगर के मुख्य मार्ग पर पेयजल की मुख्य पाइपलाइन गंदे नाले के भीतर से गुजरती हुई नजर आई। नाली में गंदगी, प्लास्टिक और पान-गुटखे की पीक जमी हुई थी।
यदि किसी भी समय यहां लाइन लीक होती है, तो नाले का गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंच सकता है, जिससे स्थिति और भयावह हो सकती है।

प्रशासन और विभाग के बयान अलग-अलग

क्षेत्र के पार्षद रोहित कुमार ने माना कि गंदे पानी की समस्या वास्तविक है। उन्होंने बताया कि शिकायत के बाद जल संस्थान की टीम मौके पर आई थी, लेकिन लाइन में कोई स्पष्ट लीकेज नहीं मिला, इसके बावजूद पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ।

वहीं जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आर.एस. लोशाली का कहना है कि हाल में गांधीनगर से कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, लेकिन अब मामला संज्ञान में आया है और टीम को मौके पर भेजा जाएगा।

 25 दिन पहले हुई थी लाइन वाशिंग

जल संस्थान के जेई भुवन भट्ट ने बताया कि करीब 25 दिन पहले लाइनों में सिल्ट आने की शिकायत पर प्रेशर सिस्टम से लाइन वाश (सफाई) कराई गई थी। हालांकि इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि हालात जस के तस बने हुए हैं।

बड़ा सवाल

अब सवाल यह है कि शहर के बीचों-बीच स्थित इस इलाके में साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधा से लोग कब तक वंचित रहेंगे? और क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी अनहोनी सामने आएगी?

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