दिल्ली बैठकों में दिखी उत्तराखंड कांग्रेस की नई सक्रियता, पर हरीश रावत की गैरमौजूदगी ने बढ़ाए सवाल-वरिष्ठ नेता ने बताई वजह
उत्तराखंड कांग्रेस की नई टीम गठन के बाद से पार्टी एक बार फिर सक्रिय मोड में दिखाई दे रही है। प्रदेश में विपक्ष की भूमिका को मजबूती देने के लिए कांग्रेस लगातार सड़क से लेकर दिल्ली तक आवाज बुलंद कर रही है। धराली आपदा, मानव-वन्यजीव संघर्ष और प्रदेश की अन्य ज्वलंत समस्याओं पर कांग्रेस सरकार को घेरने में जुटी हुई है। इसी बीच दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की ओर से उत्तराखंड के नेताओं से लगातार मुलाकातें की जा रही हैं, जिससे संकेत मिलता है कि 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी केंद्रीय स्तर पर भी राज्य संगठन को मजबूत करने में जुटी है। लेकिन इसी सक्रियता के दौर में एक नाम लगातार चर्चाओं से बाहर दिखाई दे रहा है—वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद गणेश गोदियाल लगातार दिल्ली में सक्रिय हैं। पदभार ग्रहण करने से पहले ही वह हाईकमान से मिलने दिल्ली पहुंचे, जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर कई वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात हुई। इससे पहले अक्टूबर महीने में भी केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं से गहन चर्चा की थी। इसके बाद 1 दिसंबर को फिर कांग्रेस नेताओं को दिल्ली बुलाया गया, जहां राहुल गांधी ने प्रदेश संगठन के सभी प्रमुख नेताओं से मुलाकात कर राज्य के हालात पर फीडबैक लिया। इन बैठकों में गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत मौजूद रहे, लेकिन हरीश रावत लगातार अनुपस्थित रहे। इसी ने सवाल खड़े किए कि आखिर क्या वजह है कि पार्टी के इतने वरिष्ठ नेता इन सभी बैठकों में शामिल नहीं हो रहे?

दिल्ली में नेताओं से होने वाली मुलाकातें केवल बड़े पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रहीं। कुछ दिनों पहले कांग्रेस के सोशल मीडिया संयोजक गौतम नौटियाल की राहुल गांधी से हुई लगभग चार घंटे लंबी मुलाकात ने भी यह संदेश दिया कि केंद्र स्तर पर बैठी कांग्रेस उत्तराखंड संगठन को काफी महत्व दे रही है। इन मुलाकातों में राज्य संगठन को मजबूत करने से लेकर दिल्ली में होने जा रही ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली की तैयारियों तक व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने स्पष्ट कहा कि पार्टी की पूरी टीम एकजुट है और संगठन के भीतर किसी भी तरह का मतभेद नहीं है। उनके अनुसार हरीश रावत से लेकर हर छोटे कार्यकर्ता तक पूरी निष्ठा से कांग्रेस को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
वहीं, हरीश रावत की अनुपस्थिति पर उठे सवालों का जवाब देते हुए प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा से मुलाकात कर लौटे प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि यह मुलाकात औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि एक सामान्य चर्चा थी। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस में हरीश रावत की उपेक्षा की बात पूरी तरह निराधार है। राज्य में हरीश रावत की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और आगे भी रहेगी। संगठन उनके मार्गदर्शन पर चलता रहा है।

इस पूरे प्रकरण पर भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ा। भाजपा प्रवक्ता मनवीर सिंह चौहान ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस चाहे दिल्ली में बैठकों की लाइन लगा दे या उत्तराखंड में बयानबाजी, इससे पार्टी की स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने हरीश रावत और गणेश गोदियाल के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि जनता कांग्रेस को लगातार नकारती रही है।
इन सभी प्रतिक्रियाओं के बीच जब हरीश रावत से उनकी अनुपस्थिति को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि वह कुछ बैठकों में नहीं जाते या तस्वीरों में नहीं दिखते, तो इससे किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। रावत ने साफ किया कि वह अब संगठन में अपनी भूमिका सीमित रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि नई टीम आगे आए और जिम्मेदारी संभाले। उन्होंने कहा कि वह अब दूर खड़े होकर नई टीम का काम देखना और उन्हें आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। उनके अनुसार उत्तराखंड कांग्रेस की नई टीम शानदार काम कर रही है और इस टीम को आगे बढ़ाने में ही उनका संतोष है।
