माल्टा मिशन पर बोले हरीश रावत: “मध्य हिमालय की अर्थव्यवस्था बचानी है तो स्थानीय फलों का सम्मान ज़रूरी”

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक बार फिर स्थानीय उत्पादों के महत्व को लेकर चर्चा में हैं। देहरादून स्थित हरिद्वार बाईपास रोड पर आयोजित उनकी खास ‘माल्टा प्रतियोगिता और माल्टा पार्टी’ ने राजनीतिक हलकों से लेकर आम लोगों तक सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इस आयोजन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों को गैरसैंण, मेहलचौरी, डीडीहाट, मोहनरी, गंगोलीहाट, राय आगर, भीमताल और तेजम जैसे उत्तराखंड के दूरस्थ इलाकों से लाए गए माल्टों के साथ रुद्रपुर व देहरादून के अमरूद, हरिद्वार का गुड़ और जौनसार की अदरक की चाय का स्वाद चखाया गया। आयोजन का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा—दो मिनट की माल्टा खाने की प्रतियोगिता, जिसमें सबसे अधिक फल खाने वाले प्रतिभागियों को ‘माल्टा क्वीन’ और ‘माल्टा किंग’ का खिताब दिया गया।

हरीश रावत ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी मध्य क्षेत्रों की आर्थिकी आज राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो चली है। यदि समय रहते इन क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति को मजबूत नहीं किया गया, तो इससे वहां की सामाजिक संरचना प्रभावित होगी और इसका असर पूरे राज्य पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय फलों का बेहतर मूल्यांकन और मूल्यवर्धन न केवल आर्थिकी को सुदृढ़ करेगा, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय परिवेश की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि अंग्रेजों ने कभी इन पहाड़ी क्षेत्रों में माल्टा और नारंगी की खेती को प्रोत्साहन देकर इन्हें आर्थिक रूप से संपन्न बनाया था। कांग्रेस सरकार के दौरान नींबू प्रजाति को ‘येलो गोल्ड’ मिशन के तहत बढ़ावा दिया गया था, साथ ही कीवी, एप्पल, एप्रिकॉट और चुलु के लिए भी अलग मिशन लॉन्च किए गए। लेकिन माल्टा मिशन शुरू होने से पहले ही सरकार बदल गई और यह योजना अधूरी रह गई।

उन्होंने चिंता जताई कि माल्टा और नींबू जैसे फलों की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है जिसे रोकना बेहद जरूरी है। रावत ने कहा—“सरकार ने माल्टा का खरीद मूल्य दस रुपये और नींबू का सात रुपये तय किया है, लेकिन इन्हें बाजार तक पहुंचाने में ही पूरा मूल्य ढुलाई पर खर्च हो जाता है। ऐसे में उत्पादन लाभकारी कैसे बने?”

यही कारण है कि उन्होंने इस कार्यक्रम से बीस रुपये किलो नींबू और पच्चीस रुपये किलो माल्टा का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने का नारा दिया। इस प्रस्ताव को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित अन्य नेताओं ने भी समर्थन दिया।

रावत का मानना है कि यदि माल्टा को उचित बाजार, बेहतर दाम और आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक उपलब्ध कराई जाए, तो यह फल मध्य हिमालयी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बड़ा गुणात्मक परिवर्तन ला सकता है। साथ ही यह स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस आगे भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास करती रहेगी, क्योंकि यही उत्तराखंड की प्राकृतिक और आर्थिक पहचान को मजबूत कर सकता है।

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