पूर्व अर्धसैनिक बल सम्मेलन में बोले सीएम धामी—“आप देश की शान, गौरव और सुरक्षा का आधार हैं”; हल्द्वानी में वीर नारियों व पूर्व सैनिकों का सम्मान, कल्याणकारी घोषणाओं की झड़ी

हल्द्वानी में आयोजित पूर्व अर्धसैनिक बलों के विशाल सम्मेलन ने बुधवार को एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड न केवल देवभूमि है, बल्कि वीरभूमि भी है। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल कैंप मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और बड़ी संख्या में मौजूद पूर्व अर्धसैनिक जवानों, वीर नारियों एवं शहीदों के परिजनों को संबोधित करते हुए उनका मनोबल बढ़ाया। उनके संबोधन ने पूरे समारोह का भावात्मक वातावरण और भी गरिमामय बना दिया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अर्धसैनिक बलों के जवानों ने देश के हर कोने में, हर परिस्थिति में अदम्य साहस और समर्पण के साथ राष्ट्र की रक्षा की है। चाहे कश्मीर की बर्फीली घाटियां हों या पूर्वोत्तर के घने जंगल, रेगिस्तान की तपती रेत हो या देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं—इन वीर जवानों ने तिरंगे की शान को सदैव सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहा कि सैनिक कभी ‘भूतपूर्व’ नहीं होता, वह जीवनभर सैनिक ही रहता है। “आप सभी भूतपूर्व नहीं बल्कि अभूतपूर्व हैं,” इस एक वाक्य ने पूरे सभास्थल में गूंजते हुए तालियों की गड़गड़ाहट को और तेज कर दिया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वे स्वयं एक सैनिक परिवार से आते हैं, इसलिए सैनिकों और उनके परिवारों की पीड़ा, त्याग और भावनाओं को भलीभांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान का कोई मूल्य नहीं होता, लेकिन यह सरकार का कर्तव्य है कि उनके परिवारों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न आने दी जाए। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने अर्धसैनिक बलों और शहीदों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया है। अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित वीरों की पुरस्कार राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीदों की स्मृति में स्मारक और शहीद द्वार निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। इस वर्ष 10 नए स्मारकों की स्वीकृति दी गई है, जो उन बलिदानियों के नाम को सदैव अमर बनाए रखेंगे। इसके साथ ही शहीदों के परिजनों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने की व्यवस्था भी लागू की जा चुकी है, जिससे उनके परिवारों को सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित हो सके।

देश की सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं पर बोलते हुए मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेना और सुरक्षा बलों में हुए तेज़ी से आधुनिकीकरण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा है और अनेक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी सफल अभियानों ने साबित किया है कि भारत के स्वदेशी हथियार दुनिया की किसी भी सेना का मुकाबला करने में सक्षम हैं।

उत्तराखंड की आंतरिक सुरक्षा पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अवैध बसावट, भूमि कब्जा, लैंड जिहाद और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य में 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है और 550 से अधिक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-रोधी कानून और भू-कानून जैसे निर्णयों ने राज्य की सामाजिक समरसता और आंतरिक सुरक्षा को नई मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की पवित्रता, संस्कृति और परंपरा की रक्षा करना हम सभी का धर्म है।

इस सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व अर्द्धसैनिक बलों और उनके परिवारों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। उन्होंने कहा कि भविष्य में राष्ट्रपति पुलिस मेडल–गैलेन्ट्री से सम्मानित होने वाले अर्द्धसैनिक जवान को राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये की एकमुश्त अनुदान राशि दी जाएगी। जिन पूर्व अर्द्धसैनिकों या वीर नारियों के पास स्वयं की कोई अचल संपत्ति नहीं है, उन्हें उत्तराखंड में संपत्ति खरीदने पर स्टांप शुल्क में 25 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि “उत्तराखण्ड राज्य अर्द्धसैनिक बल कल्याण परिषद” को अब पूर्ण रूप से क्रियाशील किया जाएगा और इसके लिए पुलिस मुख्यालय में एक कार्यालय कक्ष भी आवंटित किया जाएगा।

सैनिक कल्याण निदेशालय में उपनिदेशक (अर्द्धसैनिक) और बड़े जिलों में सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी (अर्द्धसैनिक) के पदों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें पूर्व अर्द्धसैनिकों को संविदा पर नियुक्त किया जाएगा। साथ ही अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के बच्चों को विवाह सहायता राशि सैनिकों के समकक्ष प्रदान करने की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री ने सीजीएचएस भवन के निर्माण के लिए भूमि चयन में तेजी लाने के निर्देश जिलाधिकारी को तुरंत देने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी पूर्व सैनिकों के सम्मान और कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और हर स्तर पर उनकी सहायता सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है।

सम्मेलन में मेयर गजराज सिंह बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, विधायक राम सिंह कैड़ा, दायित्वधारी डॉ. अनिल डब्बू, शंकर कोरंगा, रेनू अधिकारी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, डीआईजी शंकर दत्त पांडे, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित बड़ी संख्या में पूर्व अर्धसैनिक, अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पूर्व सैनिकों की देशप्रेम और त्याग की भावना को सलाम करते हुए उनका मनोबल बढ़ाने का जो संदेश दिया गया, वह लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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