गढ़वाल राइफल्स की शान बढ़ी- 464 अग्निवीरों ने पूरी की कठिन ट्रेनिंग, परिवारों को मिला गौरव पदक

गढ़वाल राइफल्स मुख्यालय में देशभक्ति का अद्भुत संगम, 464 अग्निवीर भारतीय सेना में हुए शामिल—पहली बार तीन धर्मों के पवित्र ग्रंथों के साथ दिलाई गई शपथ

कोटद्वार/देहरादून। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल केंद्र का परेड ग्राउंड शनिवार को एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। यहां आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड में 464 अग्निवीर कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आधिकारिक रूप से भारतीय सेना का हिस्सा बने। यह आयोजन न केवल सैन्य परंपरा का प्रतीक था, बल्कि सांस्कृतिक विविधता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण भी बन गया।

इतिहास में पहली बार—पंडित, मौलवी और पादरी साथ लेकर आए धर्मग्रंथ

समारोह की सबसे विशेष और भावनात्मक झलक वह थी जब पहली बार रेजिमेंट के परेड ग्राउंड पर पंडित, मौलवी और पादरी द्वारा तीनों धर्मों के पवित्र ग्रंथ—गीता, कुरान और बाइबल—एक साथ मंच पर लाए गए।
नव–प्रशिक्षित अग्निवीरों ने अपने-अपने धर्मग्रंथों पर हाथ रखकर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
यह दृश्य भारतीय सेना की एकता, विविधता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का अनोखा उदाहरण बनकर सामने आया, जिसे देखकर उपस्थित दर्शकों की आंखें गौरव से चमक उठीं।

सात महीने के कठोर प्रशिक्षण के बाद 464 अग्निवीर शामिल करीब 31 सप्ताह चले कठिन सैन्य प्रशिक्षण के दौरान अग्निवीरों ने

  • शारीरिक क्षमता

  • सामरिक रणनीति

  • ड्रिल

  • हथियार संचालन

  • युद्धक अभ्यास

जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
यह प्रशिक्षण उन्हें मानसिक, शारीरिक और व्यावसायिक स्तर पर भारतीय सेना के मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए डिजाइन किया गया था।

इस बैच में गढ़वाल राइफल्स और प्रादेशिक सेना दोनों के अग्निवीर शामिल रहे।

परेड की सलामी पर ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, वीरता का प्रदर्शन देखते ही बनता था

परेड की सलामी और निरीक्षण का सम्मान ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी (विशिष्ट सेवा मेडल), कमांडेंट गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, को मिला।
उन्होंने मैदान का निरीक्षण करते हुए अग्निवीरों के जज़्बे, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रशिक्षण की प्रशंसा की।

नायक भवानी दत्त जोशी वीर चक्र परेड ग्राउंड में आयोजित यह परेड आकर्षक मार्च पास्ट, शानदार तालमेल और युद्धक कौशल के शानदार प्रदर्शन से भरपूर रही।
हर कदम के साथ दर्शक दीर्घा से गूंजती तालियाँ इस आयोजन को और भी भव्य बना रही थीं।

अभिभावकों को मिला ‘गौरव पदक’, भावुक हुई आंखें

सेना ने अग्निवीरों के माता-पिता एवं अभिभावकों को ‘गौरव पदक’ प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।
मंच पर पदक ग्रहण करते समय कई अभिभावकों की आंखें पसीज उठीं।
उनके चेहरों पर गर्व और भावुकता का यह मिश्रण हर किसी को भावुक कर रहा था।

देशभर से पहुंचे परिजन—परेड ग्राउंड में दिखी लोक संस्कृति की छटा

उत्तरकाशी, टिहरी, बागेश्वर, पौड़ी, चमोली और जौनसार-बावर से पहुंचे परिजनों ने अपने पारंपरिक पहनावों से मैदान में स्थानीय संस्कृति की अनोखी झलक बिखेर दी।
समारोह के बाद जब नए सैनिकों ने अपने परिवारों से भेंट की, तो परेड ग्राउंड भावनाओं, मुस्कुराहटों और गर्व की अनुभूति से भर गया।

भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा परेड ग्राउंड

जब अग्निवीरों ने अंतिम कदमताल के साथ भारतीय सेना का अंग बनने का गौरव हासिल किया, तो परेड ग्राउंड ‘भारत माता की जय’, ‘गढ़वाल राइफल्स अमर रहे’ जैसे नारों से गूंज उठा।
यह क्षण हर सैनिक और परिवार के लिए अविस्मरणीय बन गया।

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