Badrinath Dham: शीतकालीन अवकाश से पहले पंच पूजाओं की शुरुआत, देवताओं के आगमन का पौराणिक विधान शुरू

चमोली। विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में शीतकाल के लिए कपाट बंद होने की प्रक्रिया आज से विधिवत शुरू हो गई। धाम में पंच पूजाओं का शुभारंभ होते ही धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं के आगमन का समय आरंभ माना जाता है। पौराणिक परंपरा के अनुसार धाम में छह माह मनुष्य पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि शेष छह माह भगवान बदरीविशाल की सेवा-पूजा का दायित्व देवताओं के पास रहता है।

पंच पूजाएं: देवताओं के आगमन का प्रतीक

बदरीनाथ धाम में कपाट बंद होने से पहले होने वाली पंच पूजाएं अत्यंत विशेष मानी जाती हैं। यह प्रक्रिया कपाट बंद होने के ठीक पाँच दिन पहले शुरू होती है।

लोकमान्यता है कि पंच पूजाओं के दौरान धाम में देवात्माएँ विराजमान हो जाती हैं और कपाट बंद होने के बाद आध्यात्मिक ऊर्जा का संरक्षण देवताओं द्वारा ही किया जाता है।

कपाट बंद होने से पहले होने वाली पांच प्रमुख पूजाएं इस प्रकार हैं—

1. गणेश मंदिर पूजा (पहला दिन)

  • पंच पूजाओं की शुरुआत गणेश मंदिर से होती है।

  • विशेष पूजा-अर्चना के बाद रावल द्वारा अंतिम विधियाँ संपन्न की जाती हैं।

  • इसके बाद गणेश मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

2. आदिकेदारेश्वर मंदिर में अन्नकूट (दूसरा दिन)

  • भगवान शिव को पके हुए चावल का भोग लगाया जाता है।

  • शिवलिंग को अन्नकूट से ढकने का विशेष विधान है।

  • इसके बाद यहाँ के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं।

3. धार्मिक पुस्तक पूजन (तीसरा दिन)

  • बदरीनाथ मंदिर के सभा मंडप में धार्मिक पुस्तकों का पूजन

  • वेद मंत्रों की ऋचाओं का वाचन इसी दिन पूर्ण रूप से विराम लेता है।

4. माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग (चौथा दिन)

  • लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा और कढ़ाई भोग अर्पित किया जाता है।

  • यह पूजा लक्ष्मीजी को शीतकाल में धन-धान्य और समृद्धि की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

5. बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद (पाँचवा दिन)

  • पंच पूजाओं की अंतिम कड़ी में बदरीनाथ मंदिर के कपाट विधिविधान से बंद किए जाते हैं।

“छह माह मनुष्य, छह माह देवता”— सदियों पुरानी परंपरा

पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार

  • बदरीनाथ में पूजा का अधिकार वैशाख मास से कार्तिक मास तक मनुष्यों के पास रहता है।

  • कपाट बंद होने के बाद आध्यात्मिक संरक्षण का भार देवताओं को सौंप दिया जाता है।

  • अगले वर्ष वैशाख माह में कपाट खुलते हैं और पूजा-अर्चना का अधिकार फिर से मनुष्यों को मिल जाता है।

कपाट बंद होने की तिथियाँ (2025 शीतकाल)

  • 21 नवंबर — पंच पूजाओं की शुरुआत, गणेश मंदिर की विशेष पूजा

  • 22 नवंबर — आदिकेदारेश्वर मंदिर के कपाट बंद

  • 23 नवंबर — धार्मिक पुस्तक पूजन और वेद ऋचाओं का वाचन बंद

  • 24 नवंबर — माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग, विशेष पूजा

  • 25 नवंबर, दोपहर 2:56 बजे — बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे

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