जिम कॉर्बेट प्रकरण: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के वन अधिकारी को जारी किया अवमानना नोटिस

नई दिल्ली/देहरादून।
सुप्रीम कोर्ट ने जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में उत्तराखंड के एक भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी राहुल के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले से संबंधित न्यायिक रिकॉर्ड भी तलब किया है

दरअसल, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अधिकारी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे पर रोक लगा दी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगाते हुए राज्य सरकार को दी गई अभियोजन स्वीकृति को बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन शामिल हैं, ने कहा कि यह गंभीर मामला है क्योंकि अधिकारी को यह जानकारी थी कि जिम कॉर्बेट मामले की निगरानी स्वयं सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है। इसके बावजूद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुकदमे पर स्थगन प्राप्त कर लिया।

पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा —

“हम अधिकारी और हाईकोर्ट दोनों के रवैये से बेहद व्यथित हैं। जब यह स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड में दर्ज है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में है, तो हाईकोर्ट को इस याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए था और न ही स्थगन आदेश देना चाहिए था।”

शीर्ष अदालत ने अधिकारी को 11 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

सुप्रीम कोर्ट जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान में अवैध निर्माण, पर्यावरणीय उल्लंघन और वृक्ष कटाई के मामलों की निगरानी कर रहा है। इस दौरान कई अधिकारियों और ठेकेदारों पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिनमें संबंधित वन अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने कहा कि “संवैधानिक न्यायालयों की गरिमा बनाए रखना सभी न्यायिक संस्थानों का दायित्व है।”

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