UKSSSC एग्जाम विवाद पर सीएम धामी का बड़ा बयान: पेपर लीक नहीं, नकल का मामला; सरकार ने कहा- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षा में कथित पेपर लीक प्रकरण ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों को हिला कर रख दिया है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इसे पेपर लीक कहना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह मामला नकल से जुड़ा प्रकरण है और सरकार की मंशा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।
सीएम का बयान:
मुख्यमंत्री धामी ने कहा,
“मैं इसको पेपर लीक नहीं कहूंगा, इसे आप नकल का प्रकरण कह सकते हो। नकल के प्रकरण को रोकने के लिए हमारी सरकार ने कड़ा कानून बनाया है। अपराध तो होंगे लेकिन कानून से अपराधियों को सजा मिलेगी। इस मामले में भी सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि पेपर लीक की परिभाषा यह है कि यदि प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से पहले या शुरुआती समय (सुबह 9 बजे, 10 बजे या 10:30 बजे) तक बाहर आ जाता, तो उसे पेपर लीक माना जा सकता था। लेकिन इस मामले में प्रश्न पत्र का कुछ हिस्सा परीक्षा शुरू होने के काफी समय बाद बाहर आया।
सीएम ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को परीक्षा प्रश्न पत्र के पन्ने मिले थे, तो उसकी जिम्मेदारी थी कि वह तुरंत प्रशासन या पुलिस को इसकी सूचना देता। इसके बजाय कई घंटों तक मामले को छुपाकर रखा गया और बाद में एजेंडे के साथ सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से इसे फैलाया गया, जिससे पूरे सिस्टम की छवि धूमिल करने की कोशिश हुई।
पूरा मामला:
21 सितंबर को प्रदेशभर में UKSSSC की परीक्षा आयोजित हुई। हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट परीक्षा केंद्र से यह विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि यहां से प्रश्न पत्र के तीन पन्ने बाहर आए, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
जांच में सामने आया कि परीक्षा केंद्र के 18 कमरों में से 3 (कमरा नंबर 9, 17 और 18) में जैमर नहीं लगे थे। परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के लगभग आधे घंटे बाद मुख्य आरोपी खालिद, जो अभ्यर्थी भी था, इंविजिलेटर से अनुमति लेकर बाहर निकला और प्रश्न पत्र अपने साथ ले गया।
खालिद ने वॉशरूम में जाकर प्रश्न पत्र की तस्वीरें खींचीं और तीन पन्ने अपनी बहन साबिया को भेजे। पहले से ही योजना बनाकर रखी गई थी कि ये पन्ने असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन तक पहुंचाए जाएंगे।
साबिया ने परीक्षा के बारे में जानकारी होते हुए भी पन्ने प्रोफेसर सुमन को भेज दिए, जिन्होंने सवालों के उत्तर तैयार करने की कोशिश की। लेकिन प्रोफेसर सुमन ने इस मामले की जानकारी पुलिस को देने की बजाय उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार को दी। इसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और पूरे प्रदेश में हंगामा मच गया।
पुलिस जांच और गिरफ्तारियां
जैसे ही मामला सामने आया, पुलिस ने जांच शुरू की और सबसे पहले प्रोफेसर सुमन से पूछताछ की। इसके बाद आरोपी साबिया को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में साबिया ने बताया कि इस पूरे मामले के पीछे उसका भाई खालिद है।
मामला सामने आने के बाद खालिद फरार हो गया था, लेकिन पुलिस ने उसे बाद में गिरफ्तार कर लिया। अभी तक पुलिस को खालिद का मोबाइल फोन नहीं मिला है, जिसके बारे में आशंका जताई जा रही है कि उसमें कई अहम राज छिपे हो सकते हैं।
प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाई
इस मामले में अब तक कई स्तरों पर कार्रवाई हुई है—
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मुख्य आरोपी खालिद और उसकी बहन साबिया गिरफ्तार।
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प्रश्न पत्र हल करने में शामिल असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन निलंबित।
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जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक के.एन. तिवारी निलंबित। उन्हें परीक्षा की सुचिता बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन प्रश्न पत्र बाहर जाने को उनकी लापरवाही माना गया।
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हरिद्वार एसएसपी ने कार्रवाई करते हुए एक दारोगा समेत दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है।