गणेश जोशी बनाम डीएम बंसल: आपदा राहत के बीच राजनीति की तल्ख तस्वीर

देहरादून। राजधानी देहरादून और आसपास के इलाकों में आपदा ने भारी तबाही मचाई हुई है। सहस्रधारा घाटी से लेकर शहर के कई हिस्सों तक मलबा, बारिश और भू-स्खलन से लोग बेहाल हैं। प्रशासनिक तंत्र चौकन्ना है और जिलाधिकारी सविन बंसल लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा ले रहे हैं। लेकिन इस बीच एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने आपदा राहत कार्यों से ज्यादा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है।

वीडियो में प्रदेश सरकार के काबीना मंत्री और मसूरी विधायक गणेश जोशी, डीएम सविन बंसल से नाराज़गी जाहिर करते हुए कह रहे हैं – “आप यहां क्यों आ गए? आपको तो रुकने के लिए कहा था।” वहीं डीएम बंसल हाथ जोड़कर स्थिति को शांत करने की कोशिश करते हैं और आगे बढ़ जाते हैं।

मंत्री बनाम डीएम: नाराजगी की असली वजह?

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर मंत्री गणेश जोशी एक आपदा की घड़ी में सक्रिय जिलाधिकारी से क्यों नाराज हुए? क्या यह नाराजगी प्रशासनिक अधिकारों की खींचतान का परिणाम है, या फिर मंत्री को लगा कि अधिकारी उनकी राजनीतिक छवि पर हावी हो रहे हैं?

मंत्री जोशी का तल्ख अंदाज़ तब और चौंकाता है जब वह यह कहते हुए भी नजर आते हैं कि “चीफ सेक्रेटरी ने फोन उठा लिया, कमिश्नर ने फोन उठा लिया…”। यह बयान इस ओर इशारा करता है कि शायद मंत्री और अफसरों के बीच पहले से ही तनातनी का माहौल रहा है।

आपदा की असली जड़ कौन?

पर बड़ा सवाल यह है कि सहस्रधारा और मसूरी क्षेत्र जिन हालात से जूझ रहे हैं, उसकी जिम्मेदारी किसकी है?

  • क्या यह केवल प्रशासन की नाकामी है?

  • या फिर राजनीतिक नेताओं की मिलीभगत से वर्षों से हो रहे अतिक्रमण और अवैध खनन इसका मूल कारण हैं?

मसूरी विधानसभा क्षेत्र में वन भूमि पर कब्जे, खनन पट्टों की लूट और अवैध प्लॉटिंग की बातें किसी से छिपी नहीं हैं। सवाल यह है कि इन मामलों पर मंत्री गणेश जोशी ने कभी इतनी सख्ती क्यों नहीं दिखाई?

डीएम की सक्रियता बनाम राजनीति

आईएएस अधिकारी सविन बंसल अपनी कर्मठता और सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में आपदा के समय उनका क्षेत्र में रहकर हालात संभालना स्वाभाविक है। लेकिन जब मंत्री उनकी इस सक्रियता को राजनीतिक प्रतिस्पर्धा मानने लगें तो यह तस्वीर चिंताजनक हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार टीमवर्क से चलती है, और यदि डीएम क्षेत्र में सक्रिय हैं तो इसका राजनीतिक और प्रशासनिक लाभ दोनों ही सरकार को ही मिलता है। मगर यहां स्थिति उलट दिख रही है—मंत्री उन्हें प्रतिद्वंद्वी की तरह देख रहे हैं।

जनता का असली सवाल

देहरादून की जनता पूछ रही है कि –

  • जब नदियों की जमीनें कब्जाई जा रही थीं, तब मंत्री जी कहां थे?

  • जब सहस्रधारा घाटी को अवैध निर्माणों ने खोखला कर दिया, तब किसने कार्रवाई की?

  • आज जब आपदा सिर पर है तो क्या दोष केवल अफसरों का है, या फिर दशकों से नेताओं और भू-माफियाओं की मिलीभगत भी उतनी ही जिम्मेदार है?

 

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