देहरादून। कुख्यात अपराधी प्रवीण वाल्मीकि गैंग से संबंध रखने और उसकी आपराधिक गतिविधियों में सहयोग करने के आरोप में एसटीएफ ने दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मी गैंग की मदद कर जमीन कब्जाने और पीड़ित पक्ष को धमकाने का काम कर रहे थे।
प्रवीण वाल्मीकि गैंग से जुड़े दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार
एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई, खाकी पर लगा दाग
जमीन कब्जे में मददगार पुलिसकर्मी जेल भेजे गए
गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि से रिश्ते में दो सिपाही सलाखों के पीछे
एसटीएफ ने तोड़ी खाकी की मिलीभगत
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसटीएफ) नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि पिछले महीने सूचना मिली थी कि प्रवीण वाल्मीकि गैंग का भतीजा मनीष बॉलर और उसका साथी पंकज अष्टवाल मिलकर करोड़ों की संपत्तियों पर अवैध कब्जे कर रहे हैं। इस पर जांच शुरू हुई और पहली कार्रवाई में मनीष बॉलर व पंकज अष्टवाल को हरिद्वार के गंगनहर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में फर्जी दस्तावेज तैयार करने और कई साथियों की संलिप्तता की जानकारी सामने आई। इसी कड़ी में एक महिला निर्देश पत्नी कुलदीप सिंह की भी गिरफ्तारी हो चुकी है।
जांच के दौरान सामने आया कि साल 2014 में ग्राम सुनेहरा, रुड़की निवासी श्याम बिहारी की मौत के बाद उसकी करोड़ों की संपत्ति को हड़पने की नीयत से प्रवीण वाल्मीकि गैंग सक्रिय हुआ। 2018 में संपत्ति की देखरेख कर रहे श्याम बिहारी के छोटे भाई कृष्ण गोपाल की हत्या कर दी गई। इसके बाद श्याम बिहारी की पत्नी रेखा को डराकर संपत्ति अपने नाम करने के लिए दबाव बनाया गया। जब उसने इंकार किया तो 2019 में उसके भाई सुभाष पर गोली चलवाई गई।
डर के कारण पीड़ित परिवार रुड़की छोड़कर अज्ञात स्थान पर चला गया। इसी बीच गैंग ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर संपत्ति बेच दी। इस खेल में मनीष बॉलर और उसका साथी पंकज अष्टवाल मुख्य रूप से शामिल थे।
एसटीएफ की जांच में पुलिसकर्मी शेर सिंह और हसन जैदी की संलिप्तता सामने आई। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने गैंग से सांठगांठ कर पीड़ित परिवार पर लगातार दबाव बनाया। शेर सिंह ने 26 अप्रैल 2025 को रुड़की कोर्ट परिसर में पीड़ित पक्ष की मुलाकात प्रवीण वाल्मीकि से करवाई, जबकि मार्च 2025 में हसन जैदी ने मनीष बॉलर के साथ मिलकर रेखा के बेटे सूर्यकांत को रुड़की अस्पताल में जाकर धमकाया और संपत्ति बेचने के लिए मजबूर किया।
एसटीएफ ने कॉल रिकॉर्ड, जेल मुलाकात और गवाहों के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पाई। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह कार्रवाई न सिर्फ अपराधियों और पुलिस की मिलीभगत को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे संगठित अपराधी गिरोह सरकारी सिस्टम में सेंध लगाकर अपने मंसूबे पूरे करने की कोशिश करते हैं।