उत्तराखंड: मुस्लिम युवती की सुरक्षा की गुहार, हाईकोर्ट ने दिया युवक और परिवार को सुरक्षा का आदेश

उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में एक मुस्लिम युवती ने अपने प्रेमी, जो हिंदू धर्म से है, और उसके परिवार को सुरक्षा दिलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। युवती का आरोप है कि उसके परिजन न केवल उसके विवाह के फैसले का विरोध कर रहे हैं, बल्कि युवक और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। इसके चलते उसे और उसके परिवार को खतरा है, और इसलिए उसने हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई है।

मामला: युवती ने दी सुरक्षा की याचिका

सितारगंज निवासी मुस्लिम युवती ने सितारगंज थाना प्रभारी को आवेदन देकर बताया कि वह बालिग है और हिंदू धर्म को पसंद करती है। वह अपने इलाके के एक हिंदू युवक से शादी करना चाहती है, जो डीजे और ड्राइविंग का काम करता है। हालांकि, जब उसने अपने घरवालों से इस बारे में बात की तो वे इस रिश्ते का विरोध करने लगे और युवक तथा उसके परिवार को धमकियां देने लगे।

युवती ने आरोप लगाया कि उसके परिजन इस रिश्ते के खिलाफ न केवल शब्दों में विरोध कर रहे हैं, बल्कि युवक और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। इसलिए, उसने नैनीताल हाईकोर्ट से सुरक्षा की मांग की।

हाईकोर्ट में सुनवाई और सुरक्षा का आदेश

इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने युवती से पूछा कि जिस युवक से वह शादी करना चाहती है, वह क्या काम करता है। युवती ने बताया कि वह डीजे और ड्राइविंग का काम करता है। हालांकि, जब अदालत ने युवती से यह सवाल किया कि डीजे क्या होता है, तो युवती इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाई।

कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि युवती का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन उसे अपने होने वाले पति के काम और जीवन के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। फिर भी, अदालत ने यह माना कि युवती बालिग है और अपनी इच्छा से निर्णय ले सकती है। इसके बाद कोर्ट ने सितारगंज पुलिस को आदेश दिया कि वह युवक और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

कानून के तहत युवती के अधिकार

हाईकोर्ट का यह आदेश इस बात को सिद्ध करता है कि भारतीय न्यायपालिका प्रत्येक व्यक्ति के मूल अधिकारों का सम्मान करती है, विशेष रूप से जब किसी बालिग व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा से विवाह का निर्णय लिया जाता है। साथ ही, यह भी सिद्ध होता है कि यदि किसी के निर्णय से उसके जीवन को खतरा है, तो अदालत उसके सुरक्षा अधिकारों को गंभीरता से लेती है।

परिवार और समाज की भूमिका

इस घटना ने समाज में परिवारों के प्रभाव और पारंपरिक सोच को भी उजागर किया है, जहां कुछ परिवार अपने बच्चों के चुनावों पर हावी होने की कोशिश करते हैं। हालांकि, युवती का यह कदम और अदालत का आदेश यह दर्शाता है कि समाज में परिवर्तन की आवश्यकता है, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद का सम्मान किया जा सके।

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