फर्जी कंपनी और ट्रस्ट के नाम पर 44.5 लाख की साइबर ठगी, अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़ा शातिर ठग गाजियाबाद से गिरफ्तार
देहरादून उत्तराखंड में साइबर अपराध अब नई और खतरनाक शक्लें ले रहा है। ताज़ा मामले में एसटीएफ देहरादून ने एक ऐसे शातिर को गिरफ्तार किया है जो फर्जी कंपनियां और ट्रस्ट बनाकर लोगों को ठग रहा था। आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से उसके संपर्कों का भी खुलासा हुआ है। पुलिस को आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, बैंक चेक बुक, मोबाइल फोन और ट्रस्ट डीड जैसी सामग्री मिली है।
44.50 लाख रुपये की ठगी: वरिष्ठ नागरिक बना शिकार
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ नवनीत सिंह ने प्रेस को बताया कि साइबर क्राइम थाना देहरादून को कुछ समय पूर्व एक शिकायत प्राप्त हुई थी।
शिकायतकर्ता, जो कि कैनाल रोड, देहरादून के वरिष्ठ नागरिक हैं, ने बताया कि उन्हें फेसबुक लिंक के ज़रिए ‘अभिनंदन स्टॉक ब्रोकिंग वीआईपी ग्रुप’ में जोड़ा गया।
इस ग्रुप में उन्हें शेयर ट्रेडिंग, आईपीओ, एफपीओ में भारी मुनाफे का झांसा दिया गया। आरोपियों ने उन्हें गूगल प्ले स्टोर से “ASBPL” नामक एक मोबाइल एप डाउनलोड करने को कहा।
शिकायतकर्ता ने एप डाउनलोड कर 44.50 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें पता चला कि उनके साथ सुनियोजित साजिश के तहत साइबर ठगी की गई है।
गाजियाबाद से आरोपी अजय त्रिपाठी गिरफ्तार
एसटीएफ की जांच में सामने आया कि इस ठगी के पीछे मुख्य साजिशकर्ता अजय त्रिपाठी, निवासी गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश है। उसे गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया। उसकी गिरफ्तारी के दौरान जो सामग्री बरामद हुई वह चौंकाने वाली है:
बरामद सामग्री में शामिल हैं:
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5 चेक बुक (विभिन्न बैंकों से संबंधित)
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3 फर्जी स्टैम्प (सरस्वती फाउंडेशन, एक्सएमपीएस एस्टेट इम्पेक्स प्रा. लि. आदि के नाम से)
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3 पैन कार्ड (फर्जी विवरण के साथ)
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2 आधार कार्ड (अलग-अलग पते दर्शाते हुए)
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1 डेबिट कार्ड (यस बैंक)
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3 ट्रस्ट/कंपनियों की फ्लैक्सी
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1 मोबाइल फोन (सिम सहित)
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अतिरिक्त 2 सिम कार्ड
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3 ट्रस्ट डीड (श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट, सरस्वती फाउंडेशन, एक्सएमपीएस एस्टेट इम्पेक्स प्रा. लि.)
विदेशी साइबर गिरोह से भी संपर्क
आरोपी से पूछताछ और उसके मोबाइल की टेलीग्राम चैट की जांच में यह खुलासा हुआ कि उसका कम्बोडिया और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों से संपर्क था। वह ‘श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट’ के नाम से बैंक खाता संचालित कर रहा था, जो कि कई साइबर अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग में प्रयुक्त हुआ है।
पूछताछ में कबूलनामा: लालच में किया अपराध
पूछताछ के दौरान आरोपी अजय त्रिपाठी ने स्वीकार किया कि उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर, ट्रस्ट और कंपनियां बनाईं और उनके नाम पर बैंक खाते खोलकर साइबर ठगी में इस्तेमाल किए। उसने यह भी माना कि वह लालच में आकर इस गिरोह का हिस्सा बना।
आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं और क्या देश के अन्य हिस्सों में भी इस नेटवर्क की शाखाएं फैली हुई हैं।
एसटीएफ का कहना है कि यह केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक व्यापक साइबर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता है।
सावधान रहें: यह तरीका बनता जा रहा है आम
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सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए लोगों को फाइनेंशियल ग्रुप में जोड़कर
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नकली ऐप डाउनलोड करवाकर
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मोटे मुनाफे का लालच देकर
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फर्जी संस्थाओं के नाम पर बैंक खातों के ज़रिए भारी-भरकम ठगी की जा रही है।