उत्तराखंड में भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार: सतपुली के उपकोषाधिकारी रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

देहरादून/पौड़ी गढ़वाल
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम को एक और बड़ी सफलता मिली है। राज्य सतर्कता (विजिलेंस) विभाग की टीम ने पौड़ी जिले के सतपुली क्षेत्र में उपकोषाधिकारी (Sub-Treasury Officer) कौशल कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की “जीरो टॉलरेंस नीति” को दर्शाती है, बल्कि सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के तंत्र को उजागर करने वाली एक अहम कड़ी भी मानी जा रही है।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण बिल पास करने के एवज में मांगी थी रिश्वत

मामले की जानकारी के अनुसार, सतपुली निवासी रविंद्र रावत ने विजिलेंस कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि सतपुली नगर क्षेत्र में डोर-टू-डोर कचरा एकत्रीकरण योजना के जून-जुलाई माह के ₹10 लाख के बिल को पास कराने के लिए उपकोषाधिकारी द्वारा प्रतिशत के हिसाब से रिश्वत की मांग की जा रही थी।

शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद, विजिलेंस विभाग ने पूरी योजना के तहत एक ट्रैप ऑपरेशन तैयार किया।

8,000 रुपये लेते हुए रंगे हाथ दबोचा

शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए पूर्व निर्धारित राशि ₹8,000 को चिन्हित कर विजिलेंस टीम ने आरोपी अधिकारी से मिलवाया। जैसे ही उपकोषाधिकारी ने रकम स्वीकार की, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रंगेहाथ पकड़ लिया

इस पूरी कार्रवाई के दौरान मौके पर विजिलेंस अधिकारी मौजूद थे और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि आगे की जांच में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

विभागीय गलियारों में मचा हड़कंप

उपकोषाधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर तैनात अधिकारी की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। यह वही अधिकारी हैं जिन पर वित्तीय अनुशासन, सरकारी भुगतानों और खातों की निगरानी की जिम्मेदारी होती है। अब उनके खिलाफ रिश्वतखोरी के आरोप साबित होने पर न केवल कठोर कानूनी कार्रवाई, बल्कि विभागीय निलंबन व सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी संभव है।

विजिलेंस की ओर से आगे की कार्रवाई जारी

विजिलेंस टीम ने आरोपी अधिकारी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि

  • क्या यह पहली बार रिश्वत ली गई या पहले भी इसी तरह से भुगतान रोककर धन वसूली की जाती रही है?

  • कहीं यह कोई बड़ा नेटवर्क तो नहीं जिसमें अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हों?

फिलहाल, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

सरकार की ‘भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड’ नीति को बल

इस कार्रवाई से उत्तराखंड सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति को और बल मिला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही स्पष्ट किया है कि सरकारी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर हो।

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