“देहरादून की बेटी बनी देश की शान – प्रियम्बदा चौधरी ने जीता मिसेज इंडिया एम्प्रेस 2025 का ताज”
देहरादून/नई दिल्ली – देवभूमि उत्तराखंड की धरती एक बार फिर गौरवान्वित हुई है। देहरादून की बहुप्रतिभाशाली और आत्मविश्वासी प्रियम्बदा चौधरी ने ‘मिसेज इंडिया एम्प्रेस 2025’ (सीजन 6) का ताज जीतकर पूरे देश में एक मिसाल कायम की है। यह प्रतिष्ठित सौंदर्य और व्यक्तित्व प्रतियोगिता विजनारा ग्लोबल द्वारा आयोजित की जाती है, जो विवाहित महिलाओं को आत्म-अभिव्यक्ति और नेतृत्व के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करती है।
आत्मबल और आत्मविश्वास की प्रेरणास्रोत बनीं प्रियम्बदा
प्रियम्बदा चौधरी ने न केवल प्रतियोगिता के सभी राउंड्स—प्रतिभा प्रदर्शन, व्यक्तित्व मूल्यांकन, प्रश्नोत्तर सत्र और वॉक—में शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि निर्णायकों के दिल भी जीत लिए। उनकी वाणी, दृष्टिकोण और सोच में वह परिपक्वता थी जो उन्हें बाकियों से अलग बनाती है।

आस्था और आभार से शुरू हुई सफलता की कहानी
अपनी ऐतिहासिक जीत पर प्रियम्बदा ने कहा:
“सबसे पहले मैं अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण और भोलेनाथ का आभार व्यक्त करती हूँ, जिनकी कृपा के बिना यह संभव नहीं था। साथ ही अपने परिवार, मित्रों, मार्गदर्शकों, मीडिया और विजनारा ग्लोबल टीम को दिल से धन्यवाद देती हूँ। यह ताज मेरे अकेले का नहीं, हम सभी के सपनों और विश्वास का प्रतीक है।”
“यह ताज केवल मेरे सिर का नहीं – यह हर महिला के हक की पहचान है”
प्रियम्बदा ने अपने विजयी संबोधन में कहा:
“मैं यह ताज उन सभी महिलाओं के नाम करती हूँ जिनकी आवाज कभी दबा दी गई थी। यह जीत इस बात का प्रमाण है कि शादी, मातृत्व या जिम्मेदारियाँ किसी महिला के सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकतीं। सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों से प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि बराबरी, सम्मान और अवसर पाना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि नारी सशक्तिकरण का असली अर्थ है:
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सपने देखने की आज़ादी
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अपनी पसंद चुनने का अधिकार
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‘ना’ कहने का साहस
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और खुद से ‘हां’ कहने का आत्मबल

“सशक्त महिला अवसर नहीं खोजती – वह उन्हें खुद बनाती है”
प्रियम्बदा का मानना है कि जब एक महिला खुद को महत्व देना शुरू करती है, तो उसका प्रभाव केवल उसी तक सीमित नहीं रहता – पूरा परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियाँ ऊपर उठती हैं। यह सोच ही उन्हें एक सच्ची लीडर और रोल मॉडल बनाती है।
महिला नेतृत्व की नई परिभाषा लिखने का संकल्प
प्रियम्बदा अब केवल एक ताजधारी नहीं, बल्कि एक मिशन की वाहक बन चुकी हैं। उनका उद्देश्य है:
“हर उस महिला को सशक्त बनाना जो आत्म-संदेह में जी रही है। मुझे विश्वास है कि हर महिला में नेतृत्व की शक्ति है, बस उसे पहचानने और निखारने की जरूरत है।”