“स्मार्ट मीटर से बढ़ा बिजली बिल, गन्ना भुगतान भी अटका: अनिश्चितकालीन धरने पर उतरे किसान”

रुड़की में किसानों का उग्र आंदोलन, सरकार को दी चेतावनी — “अब नहीं रुकेगा किसान संघर्ष”

रुड़की (हरिद्वार), उत्तराखंड के रुड़की में किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है।


स्मार्ट मीटर से बढ़े बिजली बिल, शुगर मिलों द्वारा गन्ना भुगतान में देरी और बकाया बिजली बिलों की वसूली को लेकर किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।


एसडीएम कोर्ट परिसर, रुड़की में किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है और साफ चेतावनी दी है — “जब तक मांगे नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा।”

किसानों की तीन प्रमुख मांगें

स्मार्ट मीटर हटाओ, खेती बचाओ

किसानों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बिजली बिल दोगुना-तीनगुना तक बढ़ गया है।
जहां पहले सिंचाई की बिजली पर राहत मिलती थी, वहीं अब “डिजिटल मीटरिंग” के नाम पर मनमाने रीडिंग और अधिक बिल थोपे जा रहे हैं।

❝ खेती पहले ही घाटे का सौदा बन गई है, अब बिजली बिल की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ❞ — प्रदर्शनकारी किसान नेता

शुगर मिलों से गन्ना बकाया भुगतान

किसानों की दूसरी बड़ी मांग शुगर मिलों पर बकाया करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़ी है।
उनका कहना है कि गन्ना सप्लाई के बावजूद मिलें महीनों तक भुगतान नहीं करतीं, जिससे किसान कर्ज़, ब्याज और साहूकारों के दबाव में आते जा रहे हैं।

❝ अगर सरकार भुगतान दिलाने में असफल है, तो उसे गारंटी लेनी चाहिए। ❞

पुराने बिजली बिलों में राहत

तीसरी मांग में किसानों ने पुराने बिजली बिलों पर ब्याज और जुर्माना माफ करने की मांग रखी है।
उनका तर्क है कि कई बिल गलत मीटर रीडिंग या देरी से जारी हुए हैं, जिनकी वसूली अब अन्याय है।

“वादे बहुत हुए, अमल कब?” – किसान नेताओं का सरकार पर हमला

किसान नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने कहा कि “सरकार चुनाव से पहले किसानों से वादे करती है लेकिन बाद में भूल जाती है।”
महंगाई, डीजल की कीमतें, उर्वरक, कीटनाशक, बीज और बिजली — सब महंगा हो चुका है, पर MSP और भुगतान नीति में कोई सुधार नहीं।

धरना बना जन आंदोलन का केंद्र

धरने में आसपास के हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बिजनौर से भी किसान पहुंच रहे हैं।
सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी, पोस्टर-बैनर, और “खेती बचाओ” के नारों से परिसर गूंज उठा।
किसानों का कहना है कि यह केवल एक क्षेत्रीय आंदोलन नहीं, बल्कि “पूरे उत्तर भारत के किसानों की आवाज़” है।

सरकार की ओर से अभी तक नहीं आया कोई आश्वासन

अब तक शासन या प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन या वार्ता की पहल नहीं हुई है।
हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने ज्ञापन ले लिया है, लेकिन धरना स्थल पर न तो एसडीएम पहुंचे और न ही ऊर्जा विभाग के अधिकारी।

आंदोलन की चेतावनी: “अब पीछे नहीं हटेंगे”

धरना दे रहे किसान मोर्चा के संयोजक, बलवंत सिंह ने साफ कहा:

❝ अगर सरकार ने हमारी मांगे नहीं मानीं तो यह आंदोलन पूरे राज्य में फैलेगा। यह सिर्फ किसान की नहीं, गांव-गांव की लड़ाई है। ❞


धरने की प्रमुख विशेषताएं

मुद्दा विवरण
 बिजली बिल स्मार्ट मीटर के बाद भारी वृद्धि
 गन्ना भुगतान कई मिलों पर करोड़ों की देरी
 पुराने बिल राहत और छूट की मांग
 स्थान एसडीएम कोर्ट, रुड़की
 आंदोलन अनिश्चितकालीन धरना, राज्यव्यापी बनाने की चेतावनी

स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ी

प्रशासन को डर है कि यदि यह आंदोलन लंबा चला, तो यह शुगर मिल क्षेत्रों, पश्चिमी यूपी और तराई क्षेत्र में फैल सकता है।
पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है, जबकि खुफिया एजेंसियां इस आंदोलन की गतिविधियों पर निगरानी कर रही हैं।

उत्तराखंड जैसे कृषि-प्रधान राज्य में यदि किसान का धैर्य जवाब दे गया है, तो यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं, गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकेत है।
सरकार के लिए यह वक़्त है — वादों से आगे बढ़कर, समाधान देने का।

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