नैनीताल में ऐतिहासिक धरोहर ‘ओल्ड लंदन हाउस’ राख, आग की लपटों में झुलसी एक ज़िंदगी
▪︎ प्रो. अजय रावत की 85 वर्षीय बहन शांता बिष्ट की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत▪︎
1863 में बना लकड़ी का भवन धधकता हुआ इतिहास में तब्दील
▪︎ दमकल की देरी पर उठे सवाल, लोगों ने बताया ‘मानव लापरवाही की सबसे बड़ी आग’
नैनीताल | 28 अगस्त 2025
नैनीताल की शांत और सुरम्य वादियों में बुधवार रात एक भयानक त्रासदी ने इतिहास, भावनाओं और जीवन को एक साथ निगल लिया। मल्लीताल के मोहनको चौराहे पर स्थित 1863 में बना ऐतिहासिक ‘ओल्ड लंदन हाउस’ देखते ही देखते भीषण आग की लपटों में राख हो गया।
सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि इस हादसे में प्रख्यात इतिहासविद् प्रोफेसर अजय रावत की 85 वर्षीय बहन शांता बिष्ट जिंदा जल गईं। उनका शव पूरी तरह जलकर फर्श से चिपका हुआ मिला — एक ऐसा दृश्य जिसने मौके पर मौजूद हर शख्स की आत्मा झकझोर दी।
धमाके के साथ लगी आग, फैलते ही घेर लिया पूरा भवन
रात करीब साढ़े नौ बजे अचानक एक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इसके बाद ओल्ड लंदन हाउस से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं। यह भवन लकड़ी से बना था, जो आग की चपेट में आते ही पूरी तरह जलने लगा।
भीतर मौजूद लोग चीख-पुकार मचाते हुए बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। कुछ बहादुर युवाओं ने जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बचाया, लेकिन हर किसी को नहीं निकाला जा सका।
दमकल की देरी: एक घंटे बाद शुरू हुआ बचाव, तब तक बहुत देर हो चुकी थी
स्थानीय फायर स्टेशन घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर है, लेकिन दमकल की पहली गाड़ी एक घंटे बाद पहुंची। इस लापरवाही ने आग को राक्षसी रूप देने का काम किया।
जब तक हल्द्वानी, भीमताल, अल्मोड़ा, रानीखेत, रामनगर और ऊधमसिंहनगर से अतिरिक्त दमकलें, सेना व एयरफोर्स के टेंडर और बचाव टीमें मौके पर पहुंचतीं, तब तक पूरा भवन जलकर खाक हो चुका था।
रेस्क्यू में मुश्किलें, पूरा क्षेत्र धुएं से घिरा
दमकल कर्मियों और एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की टीमों को भवन के भीतर दाखिल होने में धुएं और आग की तीव्रता के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आसपास के मकान खाली कराए गए और बिजली आपूर्ति तत्काल बंद कर दी गई।
शांता बिष्ट की मृत्यु के बाद पूरा क्षेत्र गमगीन माहौल में डूब गया। स्थानीय निवासी उन्हें एक सौम्य और सहयोगी महिला के रूप में जानते थे।
ओल्ड लंदन हाउस: एक युग का अंत
‘ओल्ड लंदन हाउस’ नैनीताल का एक ऐतिहासिक प्रतीक था, जिसकी नींव ब्रिटिश काल में 1863 में पड़ी थी।
यह भवन न केवल स्थानीय विरासत, बल्कि पर्यटन और पुरातत्व के नजरिए से भी अमूल्य था। इसके जलने के साथ नैनीताल ने अपने अतीत का एक चमकता पन्ना खो दिया है।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप, नेताओं का दौरा
घटना की जानकारी मिलते ही आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल, एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा, एडीएम शैलेंद्र नेगी, विधायक सरिता आर्या और कई अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंचे।
प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और शॉर्ट सर्किट को प्राथमिक कारण माना जा रहा है, लेकिन स्थानीय जनता ने दमकल विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
स्थानीय जनता का गुस्सा: “यह हादसा नहीं, सिस्टम की असफलता थी”
स्थानीय निवासियों का कहना है:
“अगर दमकल समय से पहुंच जाती तो शायद यह त्रासदी इतनी भयावह न होती।
हमने फोन किया, चिल्लाए, भागे, लेकिन कोई समय पर नहीं आया।”