धराली में लापता लोगों की तलाश थमी, परिजनों की बेचैनी बढ़ी

उत्तरकाशी। धराली आपदा को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आपदा स्थल तक सड़क मार्ग पूरी तरह बहाल नहीं हो सका है। यह कहना भी मुश्किल है कि रास्ता दो दिन में खुलेगा या चार दिन में। इस बीच, हवाई उड़ानों के जरिए पर्यटकों का रेस्क्यू और खाद्य व आवश्यक सामान की आपूर्ति जारी है, जो पूरी तरह मौसम की अनुकूलता पर निर्भर है।

आपदा में 30–40 फीट मलबे में दबे लोगों के जीवित मिलने की संभावना अब लगभग नामुमकिन मानी जा रही है। कितने लोग बह गए, कितने मलबे में दबे हैं और कितने घर-दुकान तबाह हुए—इनका कोई आधिकारिक आंकड़ा अभी तक सामने नहीं आया है। धराली में बाहर से काम करने आए लोगों के परिजन और यहां के वे लोग जो बाहर काम कर रहे थे, खबर सुनते ही धराली की ओर रवाना हुए, लेकिन पांच दिन बाद भी वहां नहीं पहुंच सके हैं। अपने परिजनों की कोई खबर न मिलने से उनका दर्द और बेचैनी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोग राहत और बचाव कार्य से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि आपदा प्रभावितों तक पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है, जबकि कई परिवारों का सब कुछ इस त्रासदी में खत्म हो गया है। जिनके कुछ सदस्य किसी तरह बच पाए हैं, वे अब समझ नहीं पा रहे कि कहां जाएं और क्या करें।

अभी तक रेस्क्यू अभियान का फोकस गंगोत्री क्षेत्र में फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने और उनके घर भेजने पर ही केंद्रित है। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 980 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया है। अगर सड़क मार्ग सुचारू हो जाता, तो यह रेस्क्यू कार्य पहले ही पूरा हो सकता था। मगर इसका सीधा अर्थ यह भी है कि अब मलबे में दबे लोगों की खोज संभव नहीं रही। वैसे भी, इतने दिनों बाद मलबे में दबी किसी जिंदगी का बचना बेहद कठिन है। आपदा भले ही धराली में आई हो, लेकिन राहत व बचाव का केंद्र हर्षिल, गंगनानी और गंगोत्री क्षेत्र तक ही सिमट गया है।

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