AIIMS ऋषिकेश में 8 करोड़ का घोटाला उजागर, CBI ने दर्ज की FIR
कोरोना काल में बनी सीसीयू यूनिट आज तक नहीं हुई शुरू, टेंडर फाइल भी रहस्यमय ढंग से गायब
ऋषिकेश। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की साख पर बड़ा सवाल उठाते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में करोड़ों का घोटाला सामने आया है। कोरोना महामारी के दौरान 8 करोड़ रुपये खर्च कर बनाई गई कोरोनरी केयर यूनिट (CCU) आज तक मरीजों के लिए शुरू नहीं हो सकी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच अपने हाथों में ले ली है और संबंधित अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर दी है।
2017 में बनी थी योजना, 2019-20 में हुआ भुगतान
मामले से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2017 में एम्स ऋषिकेश के कार्डियोलॉजी विभाग ने 16 बेड वाली सीसीयू यूनिट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया। भारी-भरकम टेंडर प्रक्रिया के बाद दिल्ली की कंपनी एम.एस. प्रो मेडिक डिवाइसेस को ठेका दिया गया। कंपनी ने वर्ष 2019 और 2020 में दो किस्तों में उपकरणों की आपूर्ति दिखाई और एम्स प्रशासन ने करीब 8.08 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि यूनिट एक दिन भी शुरू नहीं हुई और आज तक मरीजों को इसका लाभ नहीं मिला।
जांच में सामने आई गंभीर गड़बड़ियां
सीबीआई और एम्स अधिकारियों की संयुक्त टीम ने 26 मार्च 2024 को जब पूरे प्रोजेक्ट की जांच की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
-
खरीदे गए चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई।
-
सूचीबद्ध कई उपकरण मौके पर मौजूद ही नहीं थे।
-
जो उपकरण इंस्टॉल किए गए, वे टेंडर की शर्तों और तकनीकी मानकों पर खरे नहीं उतरे।
-
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि टेंडर से जुड़ी मूल फाइल रहस्यमय तरीके से गायब हो गई।