उत्तराखंड के न्यायालयों में 3.35 लाख केस लंबित, 2025 में 48 हजार से अधिक मामलों का हुआ निपटारा

उत्तराखंड के न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या में वर्ष 2025 के दौरान कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2026 की शुरुआत में प्रदेश के न्यायालयों में कुल 3,35,422 मामले लंबित थे, जो वर्ष 2025 की शुरुआत में लंबित मामलों की संख्या से 48,812 कम हैं।

यह जानकारी उत्तराखंड उच्च न्यायालय से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त हुई है। काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को लोक सूचना अधिकारी एवं संयुक्त रजिस्ट्रार एच.एस. जीना द्वारा यह जानकारी उपलब्ध कराई गई।

उच्च न्यायालय और अधीनस्थ अदालतों का आंकड़ा

1 जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय में 55,323 मामले लंबित थे, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 59,416 हो गए।
वहीं अधीनस्थ (जिला) न्यायालयों में वर्ष की शुरुआत में 3,28,911 मामले लंबित थे, जो वर्ष के अंत तक घटकर 2,76,006 रह गए।

इस प्रकार उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों को मिलाकर वर्ष 2025 की शुरुआत में कुल 3,84,234 मामले लंबित थे, जो वर्ष के अंत तक घटकर 3,35,422 रह गए।

इन जिलों में सबसे अधिक लंबित मामले

अधीनस्थ न्यायालयों में 31 दिसंबर 2025 तक लंबित मामलों की संख्या इस प्रकार रही—

  • देहरादून – 95,298

  • हरिद्वार – 77,755

  • उधम सिंह नगर – 56,769

  • नैनीताल – 23,437

  • पौड़ी गढ़वाल – 10,868

अन्य जिलों में लंबित मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, जिनमें अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी शामिल हैं।

9 जिलों में कम हुए लंबित मामले

प्रदेश के 9 जिलों में लंबित मामलों की संख्या में कमी आई है।

  • सबसे ज्यादा कमी हरिद्वार में 19,544 मामलों की हुई।

  • दूसरे स्थान पर देहरादून में 18,857 मामलों की कमी आई।

  • तीसरे स्थान पर उधम सिंह नगर में 9,808 मामलों की कमी दर्ज की गई।

  • चौथे स्थान पर नैनीताल में 2,961 मामलों की कमी आई।

हालांकि अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली और पौड़ी जिलों में लंबित मामलों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

ज्यादा निपटारे से घटी लंबित संख्या– वर्ष 2025 में कुल 2,40,248 मामले दर्ज हुए, जबकि 2,89,060 मामलों का निपटारा किया गया, जो दर्ज मामलों का लगभग 120 प्रतिशत है।

  • उच्च न्यायालय में दर्ज मामलों की तुलना में 82% मामलों का निपटारा हुआ।

  • अधीनस्थ न्यायालयों में 124% मामलों का निपटारा किया गया।

विशेष रूप से हरिद्वार, देहरादून, उधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों में दर्ज मामलों से अधिक मामलों का निपटारा होने से लंबित मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

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