मानसून के आते ही पहाड़ों में रोपाई ने जोर पकड़

चमोली गौचर क्षेत्र में बारिश के दस्तक देते ही आषाढ़ के महीने की धान की रोपाई ने जोर पकड़ लिया है। रोपाई को लेकर कास्तकारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

जनपद चमोली के गौचर क्षेत्र में प्रचूर मात्रा में धान की खेती की जाती है । लेकिन सिंचाई की व्यवस्था दुरूस्त न होने की वजह से यहां के कास्तकारों को हर साल धान की रोपाई के लिए बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है।यही नहीं बारिश न होने की वजह से कास्तकारों के सामने धान की नर्सरी बचाने का भी घोर संकट पैदा हो जाता है। गढ़वाल मंडल में समतल खेती के क्षेत्र में अद्वीतीय पनाई क्षेत्र के कास्तकार लंबे समय से सिंचाई नहरों के मरम्मत करने की मांग करते आ रहे हैं..

लेकिन अलग राज्य बने 22 साल बीतने को हैं लेकिन प्रदेश में सरकार किसी भी दल की रही हो किसी ने भी कास्तकारों की मांग पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी। कांग्रेस सरकार ने सिंचाई बढ़ाओ खुशाली लाओ का नारा दिया तो भाजपा ने कास्तकारों की आमदनी दोगुनी करने के नारे को खूब प्रचारित प्रसारित किया लेकिन दोनों ही नारे बेइमानी साबित हुए हैं। नतीजतन आज पहाड़ के कास्तकार आज भी बारिश के भरोसे कास्तकारी कर रहे हैं। अमूमन बारिश समय पर आने से धान की रोपाई अषाढ़ के महीने शुरुआत में ही शुरू कर दी जाती है लेकिन इस बार मानसून के 15 दिन देर से आने पर अब जाकर धान की रोपाई ने जोर पकड़ लिया है। बिना बारिश के तपती गर्मी की वजह से लोगों का जीना मुहाल हो गया था। बारिश के लिए क्षेत्रवासी देवी देवताओं के शरण जाने लगे थे। बुधवार को अचानक मौसम ने करवट बदला और आधी रात के बाद बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। इससे कास्तकारों के चेहरों पर रौनक लौट आई है और उन्होंने युद्धस्तर पर धान की रोपाई का काम शुरू कर दिया है।

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