धामी सरकार ने पेश किया 5720 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट, 7 विधेयक सदन से पास, जानिए क्या है खास…

धामी सरकार ने पेश किया 5720 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट, 7 विधेयक सदन से पास, जानिए क्या है खास…

देहरादून; उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार 24 अगस्त को विधानसभा में 5720.78 करोड़ का रुपए का अनुपूरक बजट पेश कर दिया है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के प्रथम अनुपूरक बजट में कई योजनाओं का प्रावधान रखा है। साथ ही सात विधेयक पास किए गए हैं। बजट में राजस्व व्यय के अन्तर्गत 2990.53 रुपए करोड़ व पूंजीगत व्यय के अन्तर्गत 2730:25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। तो वहीं धामी सरकार ने केन्द्र पोषित योजनाओं में 3178.87 करोड़ एवं बाहय सहायतित परियोजनाओं के लिए 56 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। बता दें कि राज्य में अगले साल के शुरू में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में धामी सरकार का ये अनुपूरक बजट बेहद अहम है। इस बजट के जरिए चुनावों से पूर्व कुछ नई योजनाओं का ऐलान किया गया है। साथ ही उन योजनाओं के लिए बजट की व्यवस्था भी की गई है। बता दें कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना हेतु 100 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना हेतु 16.51 करोड रुपए, मुख्यमंत्री सौभाग्यवती योजना हेतु 8.34 करोडवरुपए, मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना हेतु रू. 7.65 करोड, आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों को दिये जाने वाले मानदेय के लिए रू. 33 करोड़ एवं पार्ट टाईम दाईयों को अतिरिक्त मानदेय के लिए रू0 15.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शहरी एवं ग्रामीण स्थानीय निकायों को समनुदेशन हेतु कुल 293 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया हैं।

वहीं केन्द्र पोषित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना हेतु रू. 570 करोड़, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हेतु कुल 449) करोड, जल जीवन मिशन योजना हेतु कुल रू० 401 करोड, अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन हेतु रू० 137.29 करोड़, प्रधान मंत्री आवास योजना हेतु रू. 70.01 करोड, स्वच्छ भारत मिशन हेतु रू. 24.65 करोड़ रूसा के अन्तर्गत विश्वविद्यालय / शासकीय तथा अशासकीय महाविद्यालयों को भवन निर्माण हेतु रू० 20 करोड़, समग्र शिक्षा में वृहद निर्माण के लिए रू. 214.57 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कोविड आपदा के आलोक में विविध प्रकार की सहायता हेतु रू. 600 करोड का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के मार्गों / पुलियों के अनुरक्षण कार्य हेतु रू० 55 करोड़, बाढ़ सुरक्षा कार्यों के संपादन हेतु रू० 30 करोड, नगरीय पेयजल / जलोत्सारण योजनाओं का निर्माण हेतु रू. 25 करोड, स्मार्ट सिटी योजना हेतु रू. 60 करोड, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में भूमि अधिग्रहण / एन. पी. वी. का भुगतान हेतु रू० 93 करोड एवं केन्द्रीय सडक निधि मद में रू. 200 करोड का प्रावधान किया गया है। श्री केदार नाथ उत्थान चौरिटेबल ट्रस्ट के अन्तर्गत श्री केदारनाथ एवं श्री बद्रीनाथ में प्रस्तावित कार्यो आदि हेतु रुपए 15 करोड़, पर्यटन विभाग के अन्तर्गत चार धाम एवं विभिन्न स्थानों हेतु भूमि क्रय के लिए रू. 15 करोड़ एवं सरकारी भवनों का पुनर्निर्माण हेतु रू. 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राजकीय महाविद्यालयों के निर्माणाधीन भवनों को पूर्ण किये जाने हेतु रू. 5 करोड़, विद्यालयों एवं छात्रावासों का निर्माण हेतु रू.10 करोड एवं केन्द्रीय विद्यालयों के निर्माण हेतु भूमि क्रय के लिए रू० 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों हेतु भूमि क्रय के लिए रू० 5 करोड, कोटद्वार मेडिकल कालेज की स्थापना हेतु रू. 20 करोड़ तथा अल्मोड़ा मेडिकल कालेज के अन्तर्गत रू० 13 करोड का प्रावधान किया गया है। पर्वतीय मार्गों में बस संचालन से होने वाली हानि की प्रतिपूर्ति हेतु रू. 42 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मॉडल राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान हेतु रू. 62.53 करोड एवं वर्क फोर्स डेवलपमेंट फार माडल इकोनोमी के लिये रू. 25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। कैम्पा योजना के अन्तर्गत रू. 150 करोड़ एवं उत्तराखण्ड विकेन्द्रीकृत जलागम विकास परियोजना हेतु रू0 30 करोड़, उद्यान बीमा योजना हेतु रुपए 26.56 करोड़, राष्ट्रीय कृषि वानिकी एवं बांस मिशन हेतु 9.42 करोड रुपए एवं राष्ट्रीय कृषि प्रसार एवं प्रौद्योगिकी मिशन / कृषि उन्नति योजनाएं हेतु रू0 8.5 करोड का प्रावधान किया गया है।. वहीं सदन में प्रश्नकाल के बाद विधानसभा में मॉनसून सत्र के दूसरे दिन उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने 3 विश्वविद्यालय को जुड़े संशोधन विधेयक रखे। डॉ. धन सिंह रावत ने IMS यूनिसन विश्वविद्यालय, DIT विश्वविद्यालय, हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय के संशोधन विधेयक पेश किया। इसके साथ ही कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने उत्तराखंड फल पौधशाला विनियमन संशोधन विधेयक रखा। संसदीय कार्य मंत्री व शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने सदन के पटल पर GST विधेयक रखा। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्रावधान संशोधन विधेयक भी सदन में रखा। इस विधेयक के पास होने के बाद मलिन बस्तियों को राहत मिलेगी मिलेगी राहत, साथ ही अतिक्रमण ध्वस्तीकरण पर तीन साल की छूट मिलेगी।

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