भीमताल के अंतर्गत आने वाले 200 गांवों के लोग बिना वर्षा झेल रहे आपदा का दंश, जानिए पूरा मामला

हल्द्वानी। भीमताल विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 200 गांवों के लोग बिना वर्षा आपदा का दंश झेल रहे हैं। हल्द्वानी से इन गांवों का संपर्क पिछले पांच दिनों से कटा हुआ है। आलम यह है कि ग्रामीण खेतों में तैयार फसल समेत अन्य सामान सिर व कंधों पर लादकर उबड़-खाबड़ मार्गों से बाजार तक पहुंचाने की जुगत में लगे हैं। रास्ता जल्द नहीं खुलने की आशंका के चलते ग्रामीण फसल खेतों में ही खराब हो जाने की फिक्र में भूस्खलन के खतरे के बीच आवाजाही करने को मजबूर हैं। काठगोदाम थाने से दो किलोमीटर आगे बढ़ते ही सड़क पर मंगलवार से भूस्खलन हो रहा है। लोक निर्माण विभाग ने पोकलैंड मशीन लगाकर मलबा हटाने का काम शुरू किया लेकिन पहाड़ी दरकने से फिर मलबा सड़क पर आ रहा है। फिलहाल सड़क से मलबा हटाने के काम रोका गया है। बताया जा रहा है कि पहाड़ी कमजोर हो चुकी है और मलबा हटाने पर पूरा पहाड़ दरक सकता है।

ऐसे में सड़क की चौड़ाई कम होने और पहाड़ी दरकने से मार्ग क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना हुआ है।कुछ अधिकारी बीते दिनों आए भूकंप को मलबा गिरने की वजह मान रहे हैं। यह मार्ग हैड़ाखान से रीठा साहिब तक के 200 गांव को जोड़ता है। अधिकांश गांव में आलू, अदरक, गडेरी, नींबू व माल्टा की फसल तैयार है। फसल बिकने के लिए हल्द्वानी मंडी में पहुंचती है। मार्ग बंद होने से ग्रामीण सिर व कंधों पर फसल व राशन लादकर आवाजाही कर रहे हैं। अधिकांश ग्रामीणों की फसलें खेतों में तैयार है। समय से मार्ग नहीं खुला तो फसल खराब हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मार्ग को खुलवाने की मांग की है।

सड़क पर बार-बार मलबा आने से लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भू विज्ञानिकों को सर्वे के लिए बुलाया था। शुक्रवार को अल्मोड़ा से पहुंची टीम ने हैड़ाखान मार्ग पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट बनाई। टीम ने मिट्टी के सैंपल लिए हैं। अब लैब में परीक्षण कराया जाएगा। लोनिवि के अधिशासी अभियंता दीपक गुप्ता ने बताया कि रिपोर्ट आने पर भूस्खलन के कारणों का पता चलेगा। मार्ग के जल्दी खुलने की संभावनाएं अभी कम हैं।

गुरुवार को विधायक राम सिंह कैड़ा ने इस मार्ग का निरीक्षण किया था। उन्होंने लोनिवि के अधिकारियों से वार्ता कर जल्द मार्ग को खुलवाने के निर्देश दिए थे। कहा था कि मार्ग बंद होने तक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था कराई जा सकती है तो वह भी करवाइए। ग्रामीणों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। शुक्रवार को भू विज्ञानिकों ने आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस मार्ग को खोलना खतरे से खाली नहीं है। 200 गांव के लोग मार्ग बंद होने से परेशान हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Corona Live Updates